विश्व टीबी दिवस के अवसर पर जिले की 91 ग्राम पंचायतें हुई टीबी मुक्त घोषित

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बीकानेर। भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के दौरान एक्टिव केस फाइंडिंग तथा सघन प्रचार प्रसार गतिविधियों की सहायता से जिले की 91 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है जिनमें से 9 ग्राम पंचायत को लगातार दूसरे साल टीबी मुक्त घोषित किया गया है। विश्व टीबी दिवस के अवसर पर जिला टीबी क्लिनिक सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पुखराज साध ने दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत विश्व के एक चौथाई टीबी रोगियों का गढ़ है। भारत में वर्तमान में 28 लाख टीबी रोगी है यानी की प्रति एक लाख पर 195 टीबी रोगी मौजूद है और जहां तक मृत्यु की बात है भारत देश में प्रति लाख रोगियों में से 22 रोगियों की मृत्यु हो जाती है। डॉ साधने बताया कि यदि सभी संभावित रोगी अपनी जांच करवा कर इलाज ले ले तो भारत जल्द ही टीबी मुक्त हो जाएगा।

जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ चंद्रशेखर मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिले भर में एक्टिव केस फाईडिंग के साथ-साथ सघन प्रचार प्रसार गतिविधियां आयोजित की गई। विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित हुए, रैलियां निकाली गई। साथ ही सोशल मीडिया पर भी जागरूकता के प्रयास किए गए और यह सभी प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम 1962 में शुरू हुआ और 2020 में इसे बदलकर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया गया है। इसका लक्ष्य है कि टीबी रोगियों की संख्या में 80% तक कमी लाकर टीबी से होने वाली मृत्यु को घटकर 3 व्यक्ति प्रति एक लाख टीबी रोगी तक लाना है। सरकार द्वारा टीबी की जांच उपचार व दवाई पूर्णतया निशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत में लगभग 40% व्यक्तियों में ट्यूबरक्लोसिस का बैक्टीरिया यानी की माइक्रोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस मौजूद है परंतु वह सुषुप्त अवस्था में है। जब व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आती है तब वह अपना असर दिखाते हुए व्यक्ति को टीबी रोगी बना देते हैं। ऐसे में कुपोषण के विरुद्ध भी बड़ा अभियान चलाया जा रहा है ताकि कोई भी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम ना रहे। वर्तमान में जिले में 5800 चिन्हित टीबी रोगी है।

उपनिदेशक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग हरिशंकर आचार्य द्वारा टीबी के विरुद्ध जन अभियान को सफल बनाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रेखांकित की। कार्यक्रम का संचालन जिला कार्यक्रम समन्वयक मालकोश आचार्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रवण कुमार वर्मा, जिला पीपीम समन्वयक विक्रम सिंह राजावत, डीआरटीबी कोर्डिनेटर रामधन पंवार, प्रताप सिंह सोढा, कर्णपाल सिंह, राजेश रंगा, राजेंद्र रामावत, चिराग सहित कार्मिक तथा प्रिंट इलेक्ट्रानिक मीडिया के संवाददाता व प्रेस फोटोग्राफर मौजूद रहे।

*संपूर्ण पोषण के लिए चल रही निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई)*

डॉ मोदी ने बताया कि निक्षय पोषण योजना के अन्तर्गत टीबी रोगीयों को पोष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने हेतु ईलाज के दौरान प्रतिमाह 1000 की राशि डीबीटी द्वारा सीधे उनके बैक खातों में उपलब्ध करवाई जाती हैं। किसी टीबी रोगी के रोग के सम्बन्ध में प्रथम सूचना देने वाले व्यक्ति को 500 रूपए प्रोत्साहन लाभ दिया जाता हैं। किसी (टीपीटी/ चिकित्सक /आशा / आंगनवाड़ी / स्वय् सेवक के रोगी के परिवारजन में टीबी प्रवेन्टीव थेरेपी करवाने पर 250 रूपये का लाभ दिया जाता हैं। इसी योजना में निक्षय मित्रों के द्वारा टीबी रोगीयों को पोषहार किट का वितरण किया जाता हैं।

*दो सप्ताह से ज्यादा खांसी और वजन में कमी है तो टीबी की जांच करवाईए*

सीएमएचओ डॉ साध ने बताया कि यदि किसी भी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा खांसी हो, वजन कम हो रहा हो, हल्का बुखार जैसे लक्षण हो तो एक बार अपने स्पूटम की टीबी जांच अवश्य करवाए। टीबी रोग का शर्तिया इलाज 6 से 12 माह में होता है जो सरकार द्वारा पूर्णतया निशुल्क है।

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