परमात्मा को भी पुत्र बनाया जा सकता है] मानस मर्मज्ञ मनावत जी ने बतायी भक्ति की शक्ति ।

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सच राजस्थान, बीकानेर 02.12.2025। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी बीकानेर में इन दिनों समर्थ शिशु राम कथा का भव्य और विराट आयोजन चल रहा है। श्रेष्ठ संतान उत्पत्ति को लेकर विद्या भारती के मार्गदर्शन में पांच दिवसीय श्री राम कथा के दूसरे दिन पंडित श्याम जी मनावत ने कहा कि भारत संबंधों का देश है। यहां संपूर्ण जीवन संबंधों से बंधा हुआ है। हमने भूमि को भी भूमि माता ही नहीं कहा बल्कि उसे मां के रिश्ते में बांधकर मातृ‌भूमि कहा। हमने गंगा गीता गायत्री को भी मां कहा है।

क्योंकि अपना देश संबंधों पर निर्भर करता है। 16 साल का खुदीराम बोस इसलिए फांसी के फंदे पर झूल गया क्योंकि वह भारत को अपनी मां मानता था। बिना संबंधों के समर्पण संघर्ष और त्याग नहीं पैदा होता। वंदेमातरम वह मंत्र है जिसमें अपनी भूमि के प्रति मां का भाव जाग्रत होता है। वह संबंधों की ही शक्ति है भारत देश में परमात्मा को भी पुत्र बना लिया जाता है। महाराज मनु ने परमात्मा को पुत्र बना लिया तो महाराज हिमाचल ने जगदंबा को अपनी बेटी बना लिया। राजस्थान की धरती की भक्तिमति मीरा जी ने भगवान को अपना पति बना लिया। यह संबंधों की ही ताकत है की वह पूर्ण ब्रह्म परमात्मा छछिया भर छाछ के लिए गोपियों के सामने नृत्य करता है। पंडित मनावत जी ने कहा कि ईश्वर के साथ संबंध बनाकर उसे ही पुत्र के रूप में प्राप्त करने की कामना करना जो ईश्वर जैसा पुत्र प्राप्त करना चाहता है वह भगवान की भक्ति के माध्यम से ईश्वर को अपना बेटा बन सकता है। श्रेष्ठ संतान उत्पत्ति की भूमिका रखते हुए कथा व्यास पंडित श्याम जी मनावत ने कहा की कहा हमने गेहूं धान और चना का उत्पादन ठीक कैसे हो इस पर तो कई यूनिवर्सिटी काम कर रही है परंतु श्रेष्ठ संतान की उत्पत्ति पर विचार करना ही आवश्यक नहीं समझा गया। संतान श्रेष्ठ नहीं होगी तब तक दुनिया की समस्त भौतिक वस्तुओं का न कोई सदुपयोग है न ही कोई महत्व है।

आज कथा का विषय गर्भवती शिक्षण शिक्षण रहा नव दम्पति जोड़ो से आरती पूजन करवाया गया 4 दिसम्बर को कथा का आकर्षण मुख्य सोपान जन्म से एक वर्ष के शिशुओं की माताओं का शिक्षण (क्षीरादावस्था) रहेगा

पंडित श्याम जी मनावत आज सुबह विद्या मन्दिर के भैया बहिनों के साथ वंदना में रहे पंडित जी ने भैया बहिनों को बताया की विद्याथी वही है जो जिज्ञासु हो, जिज्ञासा ही विद्यार्थी को प्रकाशवान बनाती है, जीवन में समय का सम्मान करना चाहिए, जीवन में क्षण व् कण का सदुपयोग करना चाहिए, सभी को स्वयं का मूल्यांकन दो प्रकार से pre valuation and post valuation करना चाहिए pre valuation से post valuation अधिक तो व्यक्ति प्रगति को अग्रसर होता है, जीवन में प्रेम की नही कर्तव्य का मूल्य अधिक होता है, कर्तव्य के लिए भगवान राम वनवास में गये

आज के मुख्य यजमान श्री नृसिंग दास जी मिमाणी रहे, मुरली मनोहर धोरे से पूज्य संत श्री श्याम सुन्दर जी महाराज का सानिध्य मिला, आदर्श शिक्षण संस्थान के जिला सचिव मूलचंद जी कथा में आये यजमानो, विद्या भारती के अधिकारियो का परिचय करवाया एवम कथा में पधारे सभी श्रोता गणों का आभार व्यक्त किया, मंच सञ्चालन लक्ष्मण दास जी रामावत ने किया, श्री मति आशा जी खंडेलवाल, डॉ जतन लाल जी बाफना, रामधन जी खाजूवाला, जवान सिंह जी (समाज सेवी) गुलाब जी दफ्तरी, शंकरलाल जी डूडी, विद्या भारती शिक्षा संस्थान जोधपुर प्रांत के प्रांत सचिव श्रीमान महेंद्र दवे, राजकुमार जी, अमोलख राम जी ज्यानी, रामलाल जी प्रजापत, भैरुदान जी , मूलाराम जी थालोड़, महावीर प्रसाद जी सारस्वत, हुकुमचंद जी भुवंता प्रधानाचार्य नवल किशोर, सुनील माली, अनुसुइया रामावत, सुशीला हाडा, सभी आचार्य गण उपस्थित रहे

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