
बीकानेर,13 अप्रेल सोमवार आज पुष्टिमार्गीय वैष्णव समाज को प्रसस्त जिन्होंने किया “आचार्य महाप्रभू श्री बल्लभाचार्य जी महाराज का प्राकट्योत्सव 549 वी जयन्ति का उत्सव शहर में पुष्टिमार्गीय मन्दिरोँ में हर्षोल्लास के साथ मनाया प्रातःकाल मँगला के खुले दर्शनों में दर्शनार्थियों में जयघोष का उच्चारण भल्लभाधीश की जय करते हुए दर्शन किये वहीं शाम 4 बजे शहर के श्री गोपाल जी मन्दिर रघुनाथसर कुँवा से श्री बललाभाधीश महाप्रभू की शोभायात्रा निकाली जिसमें वैष्णवों महिलाएं युवक-युवतियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया सर पर मंगल कलश लिए “श्री बल्लभ विठ्ठल गिरधारी,श्री महाप्रभू जी की बलिहारी का कीर्तन गाते हुए सवारी के साथ चलते हुए शहर के अनेकों मन्दिर ,श्याम सुंदर जी मन्दिर,मदन मोहन जी,द्वारिकाधीश मन्दिर,दाऊ जी मन्दिर,बिट्ठलनाथ जी,गोवर्धन नाथ जी होते हुए अन्तिम पड़ाव मूंधड़ा बगेची – ठाकुरजी श्री मदन मोहनलाल मन्दिर पहुँची जहाँ महाप्रभू जी की सवारी में विराजित महाप्रभु जी के चित्र जी को सभी वैष्णव ने पूजा अर्चना कर दण्डवत किया वहीं मन्दिर के हवेली संगीत कीर्तनकार – पं नारायण दास ज़ी रँगा ने महाप्रभू जी की बधाई के कीर्तन पद गाकर सुनाये,ताल पक्ष में पखावज पर संगत “धीरज कुमार पुरोहित रहे,वही झांझ संगत में चन्दरगोपाल पुरोहित , भागीरथ ,राम पारीक ने सहयोग किया बधाई कीर्तन – सुनोरी आज नवल बधायो हैं( राग- रामकली) पुष्टि महारस दें प्रकटे ( राग-कान्हड़ा) केसर की धोती कटि, केसरी उपरना ओढ़े ( ध्रुपद- राग-सारंग) मारग रीति दिखाई प्रकट व्है ( राग- बिहाग- धमार) व अन्त में सभी वैष्णव समाज को साथ लेकर आश्रय का पद- द्रढ इन चरणन केरो भरोसो, कृपा तो लालन ही की चाहिये से उत्सव मनाया सभी वैष्णव को प्रसाद वितरण किया!