
जयपुर। जयपुर ने एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण क्षण का साक्षात्कार किया, जब प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा “Museum of Spiritual Legacy (आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय)” को उसके नवीन, भव्य एवं अत्याधुनिक स्वरूप में समाज को पुनः समर्पित किया गया। बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित “आध्यात्मिक विरासत समारोह” आध्यात्मिकता, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का विराट उत्सव बनकर उभरा।
कार्यक्रम एवं सेण्टर प्रभारी बीके चन्द्रकला व मीडिया प्रभारी बीके पारस के अनुसार सबसे प्रमुख रूप से ब्रह्माकुमारीज की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. जयंती दीदी ने कहा कि आज विश्व जिस मानसिक अशांति, तनाव और मूल्यहीनता के दौर से गुजर रहा है, उसका एकमात्र समाधान आत्मिक जागरूकता और आध्यात्मिक जीवनशैली में निहित है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपनी वास्तविक पहचान—आत्मा—को भूलकर बाहरी उपलब्धियों में सुख खोजता है, जबकि सच्ची शांति भीतर के मूल गुणों—शांति, प्रेम, आनंद और पवित्रता—को जागृत करने से प्राप्त होती है।
“आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय” केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक ऐसा सशक्त माध्यम है जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है, उसे उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। उन्होंने सभी को राजयोग ध्यान को अपनाकर अपने जीवन में स्थायी शांति और संतुलन स्थापित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक प्रयास समाज को सही दिशा देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ब्रह्माकुमारी संस्थान इस दिशा में निरंतर सराहनीय कार्य कर रहा है।
पूर्व अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग जसबीर सिंह ने भी विचार रखे।
महासचिव राजयोगी करुणा भाई ने संस्थान की वैश्विक सेवाओं एवं आध्यात्मिक संदेश के व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संग्रहालय एक जीवंत प्रेरणा का केंद्र है।
जोनल हेड राजयोगिनी बी.के. सुषमा दीदी ने भी अपनी बात कही।
संग्रहालय के संबंध में जानकारी देते हुए सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी बी.के. चंद्रकला दीदी ने बताया कि यह संग्रहालय लगभग 45×60 वर्गफुट क्षेत्रफल में विकसित किया गया है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक और रचनात्मक प्रस्तुति के माध्यम से ब्रह्माकुमारी संस्थान के इतिहास, आध्यात्मिक ज्ञान एवं मूल्यों को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया है। इसमें एक शांतिपूर्ण मेडिटेशन रूम, विविध आध्यात्मिक मॉडल्स तथा प्रेरणादायक झांकियाँ शामिल हैं, जो प्रत्येक आगंतुक को आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराती हैं। यह संग्रहालय वर्ष 1967 में स्वयं संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की प्रेरणा से आरंभ हुई आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक युग के अनुरूप प्रस्तुत करता है।