क्षेत्र में खजूर उत्पादन बढ़ाने के लिए गुणवत्तायुक्त प्लाटिंग मेटेरियल की समयबद्ध आपूर्ति करनी होगी सुनिश्चित

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बीकानेर, 22 अप्रैल। क्षेत्र में खजूर उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान बीकानेर, काजरी, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर तथा उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञों द्वारा बुधवार को चर्चा की गई। एसकेआरएयू के अनुसंधान निदेशालय सभागार में आयोजित इस चर्चा में किसानों को गुणवत्तापूर्ण प्लाटिंग मटेरियल समय पर उपलब्ध करवाने, आफशूट पौधे विकसित करने में आ रही चुनौतियों सहित अन्य बिंदुओं पर एक्शन प्लान बनाकर कार्य पर करने की आवश्यकता जताई गई। केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक जगदीश राणे ने कहा कि क्षेत्र के किसानों में खजूर की खेती को लेकर काफी उत्साह है , परंतु गुणवत्तापरक प्लाटिंग मेटेरियल की सीमित उपलब्धता के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। ऑफशूट प्लांट तैयार करने की तकनीक विकसित करते हुए यदि इस कार्य में किसानों को सहभागी बनाया जाए तो बेहतरीन परिणाम सामने आ सकेंगे ।

अनुसंधान निदेशक एसकेआरएयू डॉ एन के शर्मा ने कहा कि प्रदेश में करीब 1500 हैक्टेयर क्षेत्र में खजूर उत्पादन किया जा रहा है, पश्चिम राजस्थान की लवणीय भूमि तथा जलवायु खजूर खेती के अनुकूल है किसानों को और प्रोत्साहित करने हेतु प्लाटिंग मेटेरियल की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने में संबंधित एजेंसियों को समन्वित प्रयास करने होंगे। डॉ शर्मा ने आफशूट प्लाटिंग तकनीक विकसित करने में वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। काजरी बीकानेर के वैज्ञानिक डॉ नवरत्न पंवार ने कहा कि सप्लाई फर्म को भी मांग के अनुरूप समय पर लक्ष्य दिए जाएं जिससे तय समय पर आपूर्ति हो सके। डॉ आर के काकानी ने कहा कि खजूर उत्पादों के मूल्य संवर्धन तकनीक व कौशल विकास से भी इस क्षेत्र के विस्तार में मदद मिलेगी। मूल्य संवर्धन तकनीक हेतु किसानों को फेसिलिटेट करना होगा।

जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ एम एम सुंदरियां ने कहा कि प्लांट मेटेरियल की गुणवत्ता की जांच के लिए डीएनए फिंगर प्रिंट लैब स्थापित करवाने में सरकार सहायता करें। हर वैरायटी की डीएनए फिंगर प्रिंट की जांच के बाद आपूर्ति होने से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।सीडलिंग के लिए लैब में सभी प्रचलित किस्मों के डीएनए संरक्षित रखने होंगे।

उद्यान विभाग की उपनिदेशक रेणु वर्मा ने प्रशिक्षण मोड्यूल बनाकर किसानों को सिखाने की बात कही । सहायक निदेशक उद्यानिकी मुकेश गहलोत ने बताया कि जिले में 31 हजार खजूर पौधों की मांग है, इसे पूरा करने के लिए ऑफशूट प्लांटिंग आवश्यक है। ‌राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत सरकार द्वारा खजूर फल बगीचा स्थापना पर किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है।

खजूर उत्कृष्टता केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि आफशूट प्लाटिंग मेटेरियल में किसानों की खाली जमीनों में भी सीडलिंग कर सफलता प्राप्त की जा सकती है। किसानों को ट्रैनिंग तथा सब्सिडी दी जाएं। वेस्टलैंड तथा सेम क्षेत्र में लवणीय भूमि में कंट्रोल सीडलिंग के माध्यम से भी पौधे तैयार किए जा सकते हैं।

खजूर की खेती कर रहे किसान शिवकरण कूकणा ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को प्रायोगिक परीक्षण दिया जाए। बैठक में काजरी जोधपुर के वैज्ञानिक डॉ पी आर मेघवाल, बीकानेर काजरी से डॉ एन एस नाथावत सहित डॉ प्रकाश सिंह शेखावत, डॉ पी के यादव, डॉ धुरंधर सिंह, डॉ जे पी सिंह, डॉ ए के शर्मा व अन्य वैज्ञानिकों ने इस संबंध में आ रही समस्याएं व समाधान से जुड़े सुझाव रखे।

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