कोड़मदेसर तालाब की बदहाली : प्यास से मर रहे पशु-पक्षी, ग्रामीणों में रोष

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बीकानेर। जिला मुख्यालय से 25 किलाेमीटर दूर ऐतिहासिक कोड़मदेसर गांव स्थित ऐतिहासिक तालाब की बदहाली अब गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। तालाब में पानी की कमी और वर्षों से उपेक्षा के चलते गांव के पशुधन और वन्य जीव प्यास से दम तोड़ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अनदेखी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

काेडमदेसर भैरु जी मंदिर के कार्यालय संचालक रामेश्वर गहलाेत पूजारी के अनुसार गाय, बकरी, भेड़, कुत्ते, ऊंट सहित जंगली जीव जैसे लोमड़ी, मोर, कबूतर और अन्य पक्षी पानी के अभाव में प्रतिदिन मर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति के बीच श्री भैंरूनाथ पुजारी वर्ग जेठमल गहलोत और गांव के जागरूक लोगों ने अपने स्तर पर पहल करते हुए ट्रकों के माध्यम से तालाब में पानी डलवाकर पशु-पक्षियों के जीवन को बचाने का प्रयास किया है। ग्रामीणों ने इस मानवीय प्रयास के लिए उनका आभार व्यक्त किया है।

मंदिर पुजारी ट्रस्ट के जेठमल गहलाेत के अनुसार बताया जा रहा है कि कोड़मदेसर तालाब की पिछले कई वर्षों से न तो सही तरीके से खुदाई हुई है और न ही मरम्मत, जिससे तालाब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। गहलाेत बताते हैं कि तालाब क्षेत्र, घाट, मेला मैदान और गांव की आबादी भूमि पर कथित रूप से भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाते बताया कि रसूखदार लोगों और कुछ जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से आम रास्ता भी पिछले एक वर्ष से बंद कर दिया गया है, लेकिन प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

पुजारियों ने बीकानेर लोकसभा सांसद और कोलायत विधानसभा क्षेत्र के विधायक से मांग की है कि वे इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर अवैध कब्जों को हटवाएं, आम रास्ता खुलवाएं और कोड़मदेसर तालाब के विकास के लिए विशेष अनुदान जारी करवाएं। ग्रामीणों का कहना है कि यह तालाब बीकानेर की ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका संरक्षण और विकास अत्यंत आवश्यक है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

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