
बीकानेर, 11 मई। एसकेआरएयू के कृषि विज्ञान केन्द्र में उर्वरक विक्रेताओं को 15 दिवसीय प्रशिक्षण देकर किसानों तक उर्वरकों के संतुलित पोषण प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, बीज एवं कीटनाशी प्रबंधन की जानकारी पहुंचाने हेतु विभिन्न तकनीकी पक्षों से रुबरु करवाया गया। सोमवार को संपन्न हुए इस प्रशिक्षण के समापन समारोह में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कुलगुरु डॉ. राजेन्द्र बाबू दुबे ने कहा कि फसलों में उर्वरकों का संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग वर्तमान की आवश्यकता है। उर्वरकों की बढ़ती खपत को देखते हुए किसान वैज्ञानिक आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें, इसमें उर्वरक विक्रेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने मृदा के उपजाऊपन को बनाए रखने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं तथा भूमि में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने के लिए जैविक पदार्थों का अधिक उपयोग करें। विक्रेता अपने यहां आने वाले किसानों को इस दिशा में प्रेरित करें।
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. दीपाली धवन ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम से कृषि आदान विक्रेताओं एवं किसानों को वैज्ञानिक जानकारी से रुबरु होने का अवसर मिला है ।प्रतिभागी यह तकनीकी जानकारी किसानों तक पहुंचाएं। प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. मदन लाल रैगर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उर्वरक अधिनियम, संतुलित पोषण प्रबंधन, जैविक एवं तरल उर्वरक, मृदा स्वास्थ्य, बीज एवं कीटनाशी प्रबंधन सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।
सहायक आचार्य
डॉ. सुशील कुमार ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा प्रशिक्षण की गतिविधियों की जानकारी दी। कृषि महाविद्यालय बीकानेर के डॉ. सुशील खरिया ने मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरक प्रबंधन विषय पर तकनीकी जानकारी प्रदान की। प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित कर आभार व्यक्त किया गया।