
बीकानेर, 13 अक्टूबर। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में महाराजा गंगा सिंह की जयंती के अवसर पर कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई के मार्गदर्शन में ‘थार मरुस्थल के भागीरथ महाराजा गंगा सिंह’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाराजा गंगा सिंह के दूरदर्शी व्यक्तित्व, जल प्रबंधन की सोच और मरुस्थलीय क्षेत्र के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि मरुस्थल की हरियाली सदैव महाराजा गंगा सिंह की ऋणी रहेगी। अकालों से त्रस्त धरती और जनता को खुशहाल बनाने के उनके प्रयासों ने उन्हें जन-जन में लोकप्रिय बनाया। जल संसाधनों के विकास और जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रेरणादायी है।
मुख्य वक्ता डॉ. गोपाल व्यास ने अपनी लिखित पुस्तक के संदर्भों के माध्यम से महाराजा गंगा सिंह के विचारों और कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाराजा गंगा सिंह का मानना था कि नदियों के पानी के उपयोग को राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसका उपयोग अधिकतम मानवता के सुख और कल्याण की भावना से किया जाना चाहिए। उनकी यह सोच जल संसाधनों के प्रति व्यापक दृष्टिकोण और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
डॉ. व्यास ने महाराजा गंगा सिंह की उदारता का प्रसंग साझा करते हुए बताया कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए चंदा देते समय उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय को चेक दिया और उस पर एक लिखकर आगे शून्य लगाते चले गए। जब तक मदन मोहन मालवीय ने स्वयं उनका हाथ पकड़कर नहीं रोका, तब तक वे शून्य लगाते रहे। यह प्रसंग उनकी दानशीलता और शिक्षा के प्रति समर्पण को उजागर करता है।
व्याख्यान के पश्चात विद्यार्थियों की प्रतिनिधि कनिष्का ने भी महाराजा गंगा सिंह के व्यक्तित्व एवं योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में सुशीला बिश्नोई ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर विभाग के अतिथि शिक्षक डॉ. मुकेश हर्ष, डॉ. रीतेश व्यास, जसप्रीत सिंह, रिंकू जोशी, भगवान दास सुथार, डॉ. संजना चौधरी सहित अन्य उपस्थित रहे।