दुख दरिद्रता को मन से निकालने पर जीवन में सुख समृद्धि निश्चित आएगी :  जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज   

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बीकानेर। राजस्थान ही नहीं, भारत की दिव्यतम चैत्र नवरात्रि गंगाशहर राेड़ स्थित अग्रवाल भवन में बीकानेर आध्यात्मिक शक्ति महोत्सव में जगत जननी राजराजेश्वरी पाताल लोक की महारानी देवी मां पद्मावतीजी की प्रतिदिन दोपहर के सत्र में विभिन्न बीज मन्त्रों, सहस्त्रनाम स्तोत्र पाठ के साथ 9 कुंडो में दुर्लभ औषधियों, गाय के शुद्ध देशी घी व मेवे इत्यादि की आहुतियों से आलौकिक ऊर्जा प्रदान कर रहे हवन यज्ञ की दिव्यता छोटीकाशी की पावन धरा को जगमग कर रही है। ग्यारह दिवसीय यह क्रम प्रतिदिन की भांति छठे दिन भी मंगलवार को जारी रहा। शक्तिपीठाधीपति, वचन सिद्ध साधक, जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंदगिरीजी महाराज की पावन निश्रा में पर्व विशेष के मद्देनज़र बीकानेर सहित देश और दुनिया से रोजाना आ रहे मां के भक्तों की बड़ी संख्या में इजाफा भी हो रहा है। विविध पूजा, आराधना, जाप, अनुष्ठान से देवी देवताओं की प्रसन्नता का शास्त्रोक्त विधान एवं व्याख्यान देते हुए साधना के शिखर पुरुष श्री वसंत विजयानंदगिरीजी महाराज ने कहा कि व्यक्ति की हर क्रिया का फ़ल प्रतिक्रिया के रूप में मिलता है। यदि नहीं मिलता है तो निश्चित ही उस क्रिया में ही गलती की संभावना है, जिसे सुधारना आवश्यक है। इस मौके पर उपस्थित सभी भक्तों को लाल धागे में मंत्रोच्चारण के साथ 27 गांठों के साथ सिद्ध कर रक्षा सूत्र बनवाया गया, इसमें भी पहली एक गांठ पूज्य जगद्गुरु के मंत्रोच्चार से लगभग सभी लोगों के धागे में चमत्कारी रुप से स्वत: लगी। संतश्रीजी ने कहा हिंदू सनातन धर्म में प्रत्येक पर्व त्यौहार की अपनी वृहद स्तर की तेजोमय आध्यात्मिक, श्रद्धा भक्तिपूर्ण महिमा है। उन्होंने कहा कि मन से संसार बनता है, मन में मस्ती है तो जीवन भी मस्त होगा। इसलिए दुख दरिद्रता को मन से निकालने पर जीवन में सुख समृद्धि निश्चित आएगी। इस दौरान दिवस विशेष को कृत्रिम जीवन नहीं जीने की सीख देते हुए श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा वाचन में जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंदगिरीजी महाराज ने बताया कि देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक मां कात्यायनी, जो कि विवाह, प्रेम एवं मनोकामना पूर्ति की देवी है। गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पाने के लिए इनकी पूजा की थी। आध्यात्म योगी संतश्रीजी वसंत विजयानंदगिरीजी महाराज ने कहा, संसार में जीने का तरीका आ जाए तभी व्यक्ति का मंदिरों, तीर्थ आदि में जाना व सत्संग प्रवचन सुनना सार्थक होगा। दया को धर्म का मूल बताते हुए पूज्य गुरुदेवश्रीजी वसंत विजयानंदगिरीजी महाराज ने यह भी कहा कि जहां दान धर्म होगा, वहां लक्ष्मीजी भी स्थिर रहेगी। वे यह भी बोले, दान देते समय भावनाएं सदैव श्रेष्ठ होनी चाहिए। श्री पार्श्व पद्मावती सेवा ट्रस्ट कृष्णगिरी द्वारा आयोजित इस विराट कथा यज्ञ महोत्सव में प्रतिदिन तीन समय का भोजन प्रसाद में विविध व्यंजन भंडारे का क्रम भी देर रात्रि तक अनवरत चल रहा है।

ट्रस्टी डॉ संकेश छाजेड़ ने बताया कि कार्यक्रम में ब्रह्म गायत्री सेवाश्रम के अधिष्ठाता पं. रामेश्वरानंद जी पुराेहित व बालोतरा से आए संत सनातनीजी महाराज ने शिरकत कर पूज्य जगद्गुरु श्रीजी का आशीर्वाद प्राप्त किया एवं अपने अपने विचार भी व्यक्त किए। आयोजन का सीधा प्रसारण पूज्यपाद जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंदगिरीजी महाराज के अधिकृत वेरीफाइड थॉट योगा यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया गया।

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