राजस्थानी भाषा अकादमी तथा इन्टेक की ओर से ‘बीकानेर की विरासत’ संगोष्ठी आयोजित

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बीकानेर, 17 अप्रैल। बीकानेर नगर स्थापना दिवस व विश्व विरासत दिवस के उपलक्ष्य में राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा इन्टेक बीकानेर चैप्टर की ओर से शुक्रवार को ‘बीकानेर की विरासत’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन रोटरी क्लब सभागार में किया गया।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि बीकानेर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष डी. पी. पच्चीसिया ने कहा कि बीकानेर की अनमोल विरासतों का संरक्षण आवश्यक है। यहां के भामाशाहों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, गौशाला आदि क्षेत्रों में हरसंभव योगदान दिया है। अध्यक्षता करते हुए रोटे. मनमोहन कल्याणी ने कहा कि बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है। इन्टेक के कन्वीनर पृथ्वीराज रतनू ने संगोष्ठी का संचालन करते हुए बीकानेर की विरासतों की महत्ता बताई। रतनू ने कहा कि विरासत को सहेजना एक पुनीत कर्त्तव्य है।

अकादमी सचिव शरद केवलिया ने बीकानेर की पुरातात्विक, स्थापत्य, धार्मिक, सांस्कृतिक, कला, साहित्यिक विरासतों के बारे में बताया। डॉ. नन्दलाल वर्मा ने कहा कि नष्ट होती विरासतों को बचाने के लिये आमजन को भी जागरूक होना पड़ेगा। डॉ. रितेश व्यास ने बीकानेर के प्राचीन जलस्त्रोतों कुएं, बावड़ी, तालाबों आदि के संरक्षण को जरूरी बताते हुए कहा कि यहां की विश्वप्रसिद्ध हवेलियां भी धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं। हिंगलाज दान रतनू ने कहा कि बीकानेर की कला, साहित्य एवं संस्कृति की विश्व में अलग पहचान है। मारवाड़ी पूरे विश्व में सांस्कृतिक दूत के रूप में कार्य करते हैं। सुधा आचार्य ने कहा कि बीकानेर के लोकगीतों में यहां की संस्कृति, परम्पराओं के साक्षात दर्शन होते हैं। डॉ. कृष्णलाल बिश्नोई ने बीकानेर के धार्मिक स्थलों एवं संत साहित्य का वर्णन किया। डॉ. गौरीशंकर प्रजापत व शिवराज भारतीय ने राजस्थानी कविताएं प्रस्तुत कीं। जगदीश रतनू ने बताया कि स्वामी कृष्णानंद जैसे महापुरुषों ने देश-विदेश में बीकानेर का नाम रोशन किया। एम.एल. जांगिड़ ने बीकानेर की शैक्षणिक विरासत की चर्चा की। मोहित बिस्सा ने बीकानेर में उपलब्ध पांडुलिपियों व उनके डिजिटलाईजेशन कार्य की जानकारी दी।

इस अवसर पर इन्टेक, दिल्ली की ओर से घनश्याम कल्याणी, प्रवीण गुप्ता, डॉ. ललित कुमार वर्मा, घनश्याम कोठारी व आवड़दान चारण को इन्टेक लाईफ मेम्बर बनाया गया, इनका अतिथियों ने अभिनंदन किया।

संगोष्ठी में विमल शर्मा, डॉ. मूलचन्द बोहरा, लव कुमार देराश्री, आलोक प्रताप सिंह, रमेश स्वामी, बृजेश लखोटिया आदि उपस्थित थे।

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