साहित्य के मंच पर ‘अपराजिता’ की दस्तक, रेणु बाला चौहान के कहानी संग्रह का भव्य लोकार्पण

बीकानेर, 06 नवंबर। बीकानेर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ी, जब महाराजा नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम में वी.आर. फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित समारोह में उपन्यासकार एवं कथाकार रेणु बाला चौहान के कहानी संग्रह ‘अपराजिता’ का लोकार्पण किया गया। सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी द्वारा प्रकाशित इस कृति का लोकार्पण शहर के साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में हुआ।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। वी.आर. फाउंडेशन के अध्यक्ष विशाल सोलंकी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों एवं उपस्थित साहित्यप्रेमियों का अभिनंदन किया। इसके बाद अतिथियों ने लेखिका की दूसरी साहित्यिक कृति ‘अपराजिता’ का लोकार्पण किया।

 

कहानी संग्रह पर पत्रवाचन करते हुए डॉ. नमामी शंकर आचार्य ने संग्रह की कहानियों और उनके पात्रों की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लेखिका ने आत्मकथात्मक शैली में रची गई कहानियों के पात्रों का प्रभावशाली चरित्र-चित्रण किया है।

 

इस अवसर पर कथाकार रेणु बाला चौहान ने अपनी लेखन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहानियों के मूल कथानक, विचारों और भावनात्मक पक्ष पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि संग्रह की रचना के दौरान उनके जीवन में कई ऐसी घटनाएं भी घटित हुईं, जिनकी झलक पाठकों को कहानियों में देखने को मिलेगी।

 

सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी के अध्यक्ष एवं प्रकाशक नदीम अहमद ‘नदीम’, तसनीम नदीम, इमरोज एवं राजेश शर्मा ने संस्था की ओर से लेखिका का सम्मान कर अभिनंदन पत्र भेंट किया। अभिनंदन पत्र का वाचन अरमान नदीम ने किया।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गोविन्द माथुर ने कहा कि साहित्य व्यक्ति के अनुभवों, विचारों और परिवेश को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। विशेष रूप से गद्य साहित्य निजी एवं सामाजिक संबंधों की उन समस्याओं को सामने लाता है, जो अक्सर अनकही रह जाती हैं। लेखिका का यह संग्रह इस दृष्टि से प्रभावशाली है।

 

मुख्य अतिथि वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं स्तंभ लेखक बुलाकी शर्मा ने कहा कि रेणु बाला चौहान की कहानियों की विशेषता यह है कि वे पाठक के मन में लगातार औत्सुक्य बनाए रखती हैं। उनका कथन इतना प्रभावशाली है कि पाठक पूरी कहानी पढ़ने के लिए प्रेरित होता है और पढ़ने के बाद भी उसके मन में लंबे समय तक सवाल और बेचैनी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि लेखिका आसपास घटने वाली घटनाओं की केवल दृष्टा नहीं, बल्कि उनकी सूक्ष्म अन्वेषक और विश्लेषक भी हैं।

 

विशिष्ट अतिथि राजेन्द्र जोशी ने संग्रह की कहानियों की सराहना करते हुए कहा कि लेखिका ने महिला कथाकार होते हुए भी पुरुष पात्रों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है। वहीं डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि संग्रह में पात्रों का संवेदनशील चित्रण और उनके अंतर्द्वंद्व की अभिव्यक्ति विशेष रूप से प्रभावशाली है। कहानियां सहज रूप से पाठकों के मन में स्थान बनाती हैं।

 

कार्यक्रम का संचालन संजय श्रीमाली ने किया तथा अंत में राजेन्द्र सिंह देपावत ने आभार व्यक्त किया।

 

समारोह में कमल चौहान, पुखराज तंवर, कन्हैया लाल कच्छावा, सीताराम कच्छावा, कमल रंगा, डॉ. अजय जोशी, राजाराम स्वर्णकार, प्रेम व्यास, डॉ. बिंदु भसीन, मुकेश व्यास, डॉ. संध्या सक्सेना, डॉ. अनु पंवार, श्यामा व्यास, मनोज पुरोहित, जकिया सुल्ताना, सुमन गहलोत, डॉ. प्रीति मोहता, डॉ. पंकज दाधीच, अरुणा त्यागी, निर्मला सांखला, डॉ. पल्लवी चौहान, डॉ. वंदना, डॉ. दीपाली, शीतल शर्मा, रेणु शर्मा, प्रमोद सुराणा, डॉ. ललित पुरोहित, सीए चंद्रकला सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

 

‘अपराजिता’ के लोकार्पण समारोह ने बीकानेर की साहित्यिक गतिविधियों को नई ऊर्जा देने के साथ कहानी लेखन और मानवीय संवेदनाओं पर सार्थक विमर्श का अवसर भी प्रदान किया।

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