विश्व आर्द्र भूमि दिवस के अवसर पर द्वारा घोंसला निर्माण प्रतियोगिता आयोजित

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बीकानेर। विश्व आर्द्र भूमि दिवस (2 फरवरी) के उपलक्ष्य में शुक्रवार को बीकानेर वनमंडल द्वारा जिले के विभिन्न विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए घोंसला निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

बीकानेर वन मंडल के उपवन संरक्षक एस. शरथ बाबू ने बताया कि इसका उद्देश्य पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता फैलाना एवं विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है।

उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति का उपयोग करते हुए प्राकृतिक एवं पुनर्नवीनीकरण सामग्री से पक्षियों के लिए सुंदर घोंसले तैयार किए। इस आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को पक्षियों के आवास संकट, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण के महत्व की भी जानकारी दी गई।

सहायक वन संरक्षक सत्यपाल सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया गया। सभी प्रतिभागियों को ‘वृक्ष मित्र’ प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। उन्होंने बताया कि ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने का प्रभावी माध्यम हैं। यह उन्हें प्रकृति से गहरे से जुड़ने और वन्यजीव संरक्षण में योगदान के लिए प्रेरित करता है। इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया जा सकता है और उन्हें संरक्षण प्रयासों में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया जा सकता है।

आयोजन में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाना (श्रीडूंगरगढ़), नारायण ग्लोबल अकादमी झझू (श्रीकोलायत), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुजानदेसर, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शेरेरा एवं आदर्श राजस्थान पब्लिक उच्च माध्यमिक विद्यालय नोखा सहित पाँच विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भागीदारी निभाई।

उल्लेखनीय है कि विश्व आर्द्र भूमि दिवस हर वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्द्र भूमि (वेटलैंड) के संरक्षण और उनके सतत प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वेटलैंड्स जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही जल शुद्धिकरण, भूजल पुनर्भरण और जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण में भी सहायक होते हैं। आर्द्रभूमियां पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, और इनके संरक्षण से प्राकृतिक संसाधनों का दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस दौरान वन मंडल बीकानेर के रेंज फारेस्ट ऑफिसर्स विक्रम सिंह, महेश जाखड़, महावीर रुहिल एवं स्टाफ सदस्य रामनारायण विश्नोई, महावीर सिंह, प्रहलाद सिंह, मदन लाल, ओमप्रकाश आदि मौजूद रहे।

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