
नई दिल्ली/बीकानेर। भारतीय पारंपरिक युद्ध कला एवं सांस्कृतिक धरोहर थांग-ता के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। भारत की प्राचीन मार्शल आर्ट थांग-ता को अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। यह निर्णय भारतीय संस्कृति, खेल और पारंपरिक युद्ध कलाओं को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
थांग-ता, जो मूल रूप से मणिपुर की प्राचीन युद्ध कला है, तलवार और भाले के कौशल के साथ आत्मरक्षा, अनुशासन और मानसिक संतुलन का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। अब NCERT पाठ्यक्रम में शामिल होने से देशभर के विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और स्वदेशी खेल परंपराओं की जानकारी प्राप्त होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ आत्मरक्षा और शारीरिक फिटनेस के प्रति भी जागरूक करेगी। इससे थांग-ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी तथा युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
खेल एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “भारतीय संस्कृति और स्वदेशी खेलों के पुनर्जागरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया है।
थांग-ता से जुड़े प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों ने केंद्र सरकार तथा NCERT का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे देश की पारंपरिक युद्ध कलाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूती मिलेगी।