
जिला कलेक्टर श्री निशांत जैन ने बुधवार को छत्तरगढ़ के राजासर भटियान में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर का निरीक्षण किया
जिला कलेक्टर ने समस्त 22 विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य सरकार की मंशा के अधिक से अधिक लोगों को इन शिविरों का लाभ प्रदान करें। उन्होंने सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शिविरों में नियमित भागीदारी निभाने तथा अंतिम प्रकरण के निस्तारण तक शिविरों में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने प्री कैंप गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए और कहा कि संबंधित ग्राम पंचायत में पूर्व में प्राप्त प्रकरणों का निस्तारण भी शिविरों के दौरान किया जाए। उन्होंने शिविरों में अब तक हुए कार्यों की जानकारी ली। इस दौरान उपखंड अधिकारी श्री पवन कुमार, तहसीलदार श्री कमलेश महरिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
*हिस्सेदारी त्रुटि की वर्षों पुरानी समस्या का हुआ समाधान*
शिविर में राजस्व अभिलेखों में दर्ज हिस्सेदारी संबंधी त्रुटि का मौके पर समाधान कर एक परिवार को बड़ी राहत प्रदान की गई। शिविर के दौरान श्री उत्तम सिंह पुत्र लाखूसिंह एवं उनके परिजनों ने शिविर प्रभारी एवं उपखंड अधिकारी छत्तरगढ़ श्री पवन कुमार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि खाता संख्या 892 की जमाबंदी में दर्ज हिस्सेदारी वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं है। इस त्रुटि के कारण उन्हें लंबे समय से राजस्व अभिलेखों से जुड़े कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शिविर प्रभारी तथा उपखंड अधिकारी श्री पवन कुमार ने राजस्व अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद पटवारी रिपोर्ट, जमाबंदी तथा अन्य राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज प्रविष्टियां त्रुटिपूर्ण हैं तथा वास्तविक स्थिति के अनुसार हिस्सेदारी संशोधन आवश्यक है।
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 136 के तहत कार्रवाई करते हुए राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन किया गया। आदेशानुसार उत्तम सिंह पुत्र लाखूसिंह एवं तेजमल सिंह पुत्र लाखूसिंह की हिस्सेदारी 5/12-5/12 दर्ज कर राजस्व अभिलेखों को शुद्ध किया गया।
*खाता विभाजन का वर्षों पुराना प्रकरण निस्तारित*
राजासर भाटियान निवासी श्री चैनाराम पुत्र कालूराम एवं श्री देवीलाल पुत्र कालूराम के नाम संयुक्त रूप से कृषि भूमि खाता संख्या 217, खसरा संख्या 399, कुल रकबा 13.5554 हेक्टेयर दर्ज था। संयुक्त खाते के कारण भूमि स्वामित्व एवं कृषि कार्यों के संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। दोनों खातेदारों ने आपसी सहमति से खाता विभाजन करवाने के लिए ग्रामीण सेवा शिविर में आवेदन प्रस्तुत किया।
आवेदन प्राप्त होने पर राजस्व विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पटवारी हल्का की रिपोर्ट प्राप्त की। मौके पर जांच एवं दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर पाया गया कि भूमि का विभाजन बिना किसी विवाद के किया जा सकता है। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए खाता विभाजन स्वीकृत किया गया तथा प्रत्येक खातेदार के नाम 6.7777 हेक्टेयर भूमि का पृथक-पृथक खाता दर्ज करने के आदेश जारी किए गए।
खाता विभाजन की प्रक्रिया पूर्ण होने से दोनों खातेदारों को अपनी भूमि पर स्पष्ट एवं स्वतंत्र अधिकार प्राप्त हो गए। इससे भविष्य में संभावित विवादों की संभावना समाप्त हुई तथा राजस्व अभिलेख भी अद्यतन हो गए।
श्री चैनाराम एवं श्री देवीलाल ने वर्षों पुरानी समस्या के समाधान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार एवं राजस्व विभाग का आभार जताया।