
चूरू, 24 जुलाई। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल की पहल पर चूरू में यूएनसीसीडी कोप-17 का प्री-कोप का आयोजन किया जाएगा। ‘ए कंट्री ऑफ द गंग कैनाल : लैंड, वाटर एंड क्लाइमेट रेसिलियंस इन द थार डेजर्ट’ विषय पर राष्ट्रीय स्तर का संवाद गंगनहर की स्थापना के शताब्दी वर्ष (1927–2027) के अवसर पर आयोजित होगा। इस दौरान भूमि पुनर्स्थापन, जल प्रबंधन, मरुस्थलीय पारिस्थितिकी, घासभूमि संरक्षण एवं जलवायु सहनशीलता पर देश के अग्रणी वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया लाएगा।
इस कार्यक्रम की संकल्पना अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकॉलॉजी एंड द एनवायरनमेंट (एटीआरईई ) तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से की गई है। कार्यक्रम 26 जुलाई को प्रातः 9:15 बजे से सायं 5:30 बजे तक चूरु के ग्रैंड शेखावाटी होटल में आयोजित किया जाएगा।
श्री मेघवाल ने बताया कि थार मरुस्थल के मध्य स्थित चूरू देश के सर्वाधिक जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में है। विश्व प्रसिद्ध ताल छापर की घासभूमि एवं समृद्ध जैव विविधता इसे इस आयोजन के लिए उपयुक्त पृष्ठभूमि प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि वर्ष-2026 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय रेंजलैंड एवं पशुपालक वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। ऐसे महत्वपूर्ण वैश्विक वर्ष में आयोजित यह प्री-कोप संवाद थार की घासभूमियों, रेंजलैंड संरक्षण, पशुपालक समुदायों, सतत भूमि प्रबंधन और जलवायु सहनशीलता के मुद्दों को वैश्विक प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए विशेष महत्व प्राप्त करता है।
उन्होंने बताया कि उद्घाटन सत्र में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मरुस्थलीकरण प्रकोष्ठ के डीआईजी श्री प्रशांत राजगोपाल लैंड डिग्रेजेशन न्यूट्रैलिटी लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे। राजस्थान के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्री के.सी. अरुण प्रसाद उद्घाटन में संबोधन देंगे।
इसके पश्चात केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य वक्तव्य देंगे। श्री मेघवाल अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों की सामाजिक एवं पारिस्थितिक विरासत पर आधारित विशेष कलाकृति का लोकार्पण करेंगे।
तकनीकी सत्र में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र, पश्चिमी राजस्थान में एक शताब्दी के सतत जल प्रबंधन से आए जलवायु परिवर्तनों पर विशेष व्याख्यान देंगे। इसके अतिरिक्त अटारी, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, सीआईएएच, आईजीएफआरआई, आफरी, एसएसी-आईएसआरओ आदि संस्थानों के विशेषज्ञ गंगनहर के इतिहास, भूमि उपयोग में परिवर्तन, घासभूमि एवं रेंजलैंड संरक्षण, चारा सुरक्षा, जैव विविधता, गोडावण संरक्षण तथा उपग्रह आधारित भूमि परिवर्तन विश्लेषण जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे।
दोपहर बाद आयोजित राउंडटेबल सत्र में अगले सौ वर्षों के लिए थार क्षेत्र की विकास रणनीति पर मृदा स्वास्थ्य, लवणीयता नियंत्रण, जल सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल कृषि, घासभूमि पुनर्स्थापन, रेंजलैंड प्रबंधन तथा पशुपालन से जुड़े नीतिगत विषयों पर विशेषज्ञों एवं नीति-निर्माताओं के बीच विचार-विमर्श होगा। समापन सत्र में जिला प्रशासन द्वारा चूरू के हीट एक्शन प्लान पर प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद बाद केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
यह प्री-कोप संवाद यूएनसीसीडी कोप-17 से पूर्व भारत के भूमि पुनर्स्थापन, सतत जल प्रबंधन और जलवायु सहनशीलता के अनुभवों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा। साथ ही, यह गंगनहर की शताब्दी को थार मरुस्थल में सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधन प्रबंधन की प्रेरक विरासत के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।