1944 में शुरू हुई भक्ति की अखंड ज्योत, गोकुल सर्कल पर 82वें वर्ष भी गूंजेगा हरिनाम संकीर्तन

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बीकानेर, 10 अक्टूबर। भक्ति, श्रद्धा और सनातन परंपरा की अनूठी मिसाल पेश कर रहा बीकानेर का अखंड हरि कीर्तन इस शारदीय नवरात्र में अपने 82वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। आजादी से पूर्व वर्ष 1944 में शुरू हुई यह भक्तिमय परंपरा आज भी पूरी आस्था और समर्पण के साथ अनवरत जारी है। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर गोकुल सर्कल स्थित मुनीम जी की कोटड़ी में एक बार फिर दिन-रात हरिनाम संकीर्तन की गूंज सुनाई देगी।

 

अखंड हरि कीर्तन समिति के अध्यक्ष पूनमचंद व्यास ने बताया कि इस धार्मिक परंपरा की शुरुआत वर्ष 1944 में रघुनाथसर कुएं के निकट एक कोटड़ी में स्वर्गीय रिखबदास जोशी (भाईया महाराज) के सान्निध्य में हुई थी। प्रारंभ में यह कीर्तन रघुनाथसर कुएं पर शारदीय नवरात्र के दौरान आयोजित होता था और लगभग 12 वर्षों तक भाईया महाराज के सान्निध्य में जारी रहा।

 

इसके बाद भाईया महाराज के दोहिते सत्यनारायण व्यास (मुनीम जी) ने इस भक्तिमय परंपरा को गोकुल सर्कल स्थित अपनी कोटड़ी में आगे बढ़ाया। तब से यह परंपरा निरंतर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

 

छह पीढ़ियों से कायम है भक्ति की परंपरा

 

समिति के प्रवक्ता राजकुमार व्यास ने बताया कि भाईया महाराज द्वारा प्रारंभ की गई अखंड हरि कीर्तन की परंपरा आज छह पीढ़ियों से निभाई जा रही है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती यह धार्मिक परंपरा न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि शहर की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को भी सहेजे हुए है।

 

82 वर्षों से जारी इस आयोजन में हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से श्रद्धालु भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं। नवरात्र के दौरान यहां भक्तिमय वातावरण बना रहता है और श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार कीर्तन में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त करते हैं।

 

11 अक्टूबर को विधि-विधान से होगा शुभारंभ

 

समिति के सचिव खुशाल व्यास ने बताया कि रविवार, 11 अक्टूबर को दोपहर 3:15 बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ अखंड हरि कीर्तन का शुभारंभ होगा। इसके बाद 19 अक्टूबर तक लगातार दिन-रात हरिनाम संकीर्तन जारी रहेगा।

 

इस दौरान श्रद्धालु ‘हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।’ महामंत्र का संकीर्तन करेंगे।

 

श्रद्धालुओं से कीर्तन में भाग लेने की अपील

 

अखंड हरि कीर्तन समिति ने इच्छुक श्रद्धालुओं से अपनी सुविधानुसार कीर्तन में भाग लेने का समय समिति के पदाधिकारियों को नोट करवाने की अपील की है, ताकि सभी भक्त इस धार्मिक आयोजन में सहभागी बन सकें।

 

शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित होने वाला यह अखंड हरि कीर्तन बीकानेर की उस आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है, जिसमें पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन भक्ति की धारा निरंतर प्रवाहित होती रही। 1944 में प्रज्वलित हुई हरिनाम संकीर्तन की यह ज्योत आज भी श्रद्धालुओं के मन में आस्था और भक्ति का प्रकाश फैला रही है।

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