
बीकानेर। रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में साध्वीश्री मुक्ताजंनाश्रीजी म.सा. ने बुधवार काे कहा कि लाेभ का त्याग करें, लाेभ ही पाप का मूल कारण है। कसाई वृत्ति काे त्याग कर प्रभु वीर का ध्यान करें। उन्हाेंने यहां उपासरे में चातुर्मासिक प्रवचन में श्रावक-श्राविकाओं से कहा कि लोभ से मन में और अधिक पाने की इच्छा (कामना) जागती है और प्राप्ति न होने पर क्रोध उत्पन्न होता है। उन्हाेंने कहा कि लालच इंसान का विवेक और बुद्धि भ्रष्ट कर देता है, जिससे वह सही-गलत का फर्क भूल जाता है। उन्हाेंने यह भी कहा कि भगवान महावीर (प्रभु वीर) का ध्यान करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। भगवान महावीर ने जीवन में सुख और शांति पाने के लिए कुछ मुख्य बातें बताई हैं, जिन्हें हम अपने जीवन में उतार सकते हैं उन्हाेंने कहा कि आपका जन्म जैन धर्म में हुआ है इसके लिए दिखावे नहीं करें सबके प्रति भाव रखें। भाव से भक्ति करें, जाे भाग्य में लिखा है वह मिलेगा ही। कमाया हुआ धन पुण्य में लगाओ। अहंकार काे त्यागाे। मन काे कंट्राेल कराे, परमात्मा की वाणी काे समझाे। उपासरे में ट्रस्ट अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि आज के प्रवचन के समय चित्तलेहांगनाश्रीजी म.सा. व चित्तखरांजनाश्री जी म.सा. ने भी विचार रखे। इस अवसर पर ट्रस्टी संदीप मुशरफ, सहमंत्री मनीष नाहटा सहित अनेक माैजूद रहे।