बीकानेर, 26 अक्टूबर। राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर के प्रताप सभागार में रविवार, 25 अक्टूबर को प्रख्यात इतिहासकार प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन की स्मृति में प्रथम स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन फाउंडेशन ट्रस्ट एवं महाविद्यालय के इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान में भारतीय संस्कृति की विविधता, समन्वय और साझा विरासत पर विचार-विमर्श हुआ। व्याख्यान का विषय “अनेक परम्पराएँ, एक समग्रता: भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझना” रहा।
मुख्य वक्ता डॉ. शेख मस्तान ने भारतीय संस्कृति की बहुलतावादी परम्परा को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति फूलों की एक माला के समान है, जिसमें हर फूल की अपनी विशिष्ट पहचान होती है, लेकिन सभी को जोड़ने वाला धागा एक ही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न भाषाओं, परम्पराओं और मान्यताओं के बीच समन्वय भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है। सांस्कृतिक विविधता भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक समन्वय के प्रतीक थे डॉ. अमीनुद्दीन
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर ने प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन के शैक्षणिक एवं ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 1966 से डूंगर महाविद्यालय के इतिहास विभाग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक समन्वय के सच्चे प्रतीक थे। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
ट्रस्ट की गतिविधियों एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व चेयरमैन प्रो. सैयद इनायत अली जैदी तथा डॉ. सुनीता जैदी ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। डॉ. अमीनुद्दीन के पुत्र एवं ट्रस्ट के पदाधिकारी डॉ. इफ्तेखारुद्दीन ने कहा कि यह स्मृति व्याख्यान भारतीय संस्कृति की बहुलतावादी परम्परा, आपसी सौहार्द और विविधता में एकता के संदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
हर वर्ष आयोजित होगा स्मृति व्याख्यान
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र पुरोहित ने कहा कि ऐसे स्मृति व्याख्यान विद्यार्थियों को अपने इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध परम्पराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन की स्मृति को अक्षुण्ण रखने और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महाविद्यालय में इस व्याख्यान परम्परा को प्रतिवर्ष जारी रखा जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नासिर जैदी ने किया। अंत में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष श्री नलिन बुधवार ने अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
प्रथम स्मृति व्याख्यान ने भारतीय संस्कृति की विविधता, साझा विरासत और आपसी सद्भाव के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन के विचारों एवं योगदान को स्मरण करने का अवसर प्रदान किया।
