
बीकानेर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा रिद्धि सिद्धि पैलेस में देव दुर्लभ गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व के अवसर पर सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्वामी नरेंद्रानंद जी ने गुरु शिष्य परम्परा के बारे में प्रसंग सुनाए।
स्वामी जी ने बताया कि गुरु एवं शिष्य का सम्बन्ध कैसा होता है ? जैसे श्री कृष्ण और अर्जुन का, मीरा और रविदास जी का एवं विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस के बारे मैं बताते हुए कहा कि विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस से एक प्रश्न किया कि, क्या ईश्वर देख जा सकता है ? और अगर देखा जा सकता है तो कैसे ? तब रामकृष्ण परमहंस ने विवेकानंद जी को ब्रह्म ज्ञान दिया अर्थात् पूर्ण गुरु का होना अति आवश्यक है क्योंकि पूर्ण गुरु ही एक शिष्य को जागृत कर सकता है। स्वामी जी ने गुरु घर की सेवा और साधना का महत्व बताया, सेवा समाज के लिए और साधना स्वयं के लिए।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संचालक एवं संरक्षक आशुतोष महाराज जी द्वारा प्राकृति संरक्षण प्रकल्प चलाया जा रहा है जिसका उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण के लाभों के बारे में जागरूक किया जा सके और उन्हें वृक्षारोपण की कला में प्रशिक्षित किया जा सके। हमारा मानना है कि वृक्षारोपण एक यांत्रिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह मनुष्य और प्रकृति के बीच मौजूद करुणा के उस सहज बंधन को पुनर्जीवित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। हम सिर्फ पेड़ नहीं लगा रहे हैं; हम मानव हृदयों में करुणा का बीज बो रहे हैं।
कथा में पधारे बताैर अतिथि समाजसेवी विनाेद गाेयल, अध्यक्ष लघु उद्योग भारती राजेश गोयल, जुगल किशोर (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शैक्षणिक न्यास गुजरगौड ब्राह्मण), सावरमल, नरेन्द्र अग्रवाल, हुक्मीराम, भवानीशंकर व्यास, गजानंद(एडवोकेट), जयदयाल सहित अनेक माैजूद थे।