
बीकानेर, 17 जुलाई। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिला प्रशासन के निर्देशानुसार शुक्रवार को त्रैमासिक सेक्टर बैठक के दौरान दहेज प्रतिषेध दिवस मनाया गया। सीडीपीओ बीकानेर शहर श्रीमती राजेश कंवर ने बताया कि सेक्टर ए में खटीकों के मोहल्ले में स्थित रामदेव मंदिर परिसर और जस्सूसर गेट नृसिंह जी के मंदिर के पास आंगनबाड़ी केन्द्र 4(1) पर त्रैमासिक सेक्टर बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान दहेज प्रतिषेध दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना तथा दहेज मुक्त समाज के निर्माण का संदेश देना रहा।
श्रीमती कंवर ने बताया कि कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं तथा स्थानीय महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान उपस्थितजनों को दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 एवं राजस्थान दहेज प्रतिषेध नियम, 2004 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि दहेज प्रथा सामाजिक बुराई है, जो महिलाओं के सम्मान, समानता और अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती है। सभी से दहेज न लेने और न देने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि विवाह एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्कार है, इसे आर्थिक लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। दहेज प्रथा के उन्मूलन के लिए परिवार, समाज और युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। साथ ही बालिकाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने दहेज प्रथा का बहिष्कार करने तथा समाज में इसके विरुद्ध जनजागरूकता फैलाने की शपथ ली। विभाग ने आमजन से अपील की कि वे दहेज मुक्त विवाह को अपनाकर एक समान, सुरक्षित और सम्मानजनक समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। कार्यक्रम में सेक्टर ए की प्रभारी महिला पर्यवेक्षक श्रीमती मंजुला पड़िहार और सेक्टर बी की प्रभारी महिला पर्यवेक्षक श्रीमती मंजू खड़गावत समेत अन्य कार्मिक उपस्थित रहे।