
बीकानेर, 21 अगस्त। माता कौशल्या देवी की स्मृति में पर्यावरण पोषण यज्ञ समिति एवं आरएसवी ग्रुप ऑफ स्कूल्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम के प्रथम दिन रोजड़, गुजरात से पधारे दर्शन योग महाविद्यालय के निदेशक, योगाचार्य एवं दर्शनाचार्य स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने स्थानीय होटल पाणिग्रहण में प्रबुद्धजनों, गणमान्य नागरिकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को दुःखों से निवृत्ति तथा सुख-शांति की प्राप्ति के उपायों से परिचित करवाया।
स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने कहा कि मनुष्य को मनुष्य जीवन अपने पूर्व कर्मों के फलस्वरूप प्राप्त होता है। कर्म पहले किए जाते हैं और उसके बाद उनके फल प्राप्त होते हैं। यही मनुष्य के सुख-दुःख का मूल कारण है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अन्य प्राणियों की तुलना में अधिक सुखी है, लेकिन पूर्ण रूप से सुखी नहीं है। इसका एक प्रमुख कारण मनुष्य का स्वार्थ है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनेक प्रकार की गलतियां करते हैं। कुछ गलतियां अनजाने में होती हैं, जबकि कुछ गलतियां जानबूझकर की जाती हैं। विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाया गया कि पढ़ाई क्यों करनी चाहिए, शिक्षा के क्या लाभ हैं तथा अध्ययन के वास्तविक उद्देश्य क्या हैं।
स्वामी जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी रुचियों को पहचानना चाहिए और अपनी रुचि के अनुरूप कार्य करना चाहिए। अपनी रुचियों एवं उद्देश्यों को सूचीबद्ध कर नियमित रूप से उनका स्मरण और अभ्यास करने से कार्य के प्रति प्रसन्नता बढ़ती है तथा जीवन के दुःखों में कमी आती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। माता-पिता और गुरु ही बालक को वास्तविक शिक्षा एवं संस्कार प्रदान कर सकते हैं। माता-पिता का दायित्व है कि वे बच्चों को परिवार के संस्कार, अच्छे चरित्र और सदाचार की शिक्षा दें।
स्वामी विवेकानंद परिव्राजक ने कहा कि मनुष्य को अच्छे कर्म करने के अनेक अवसर मिलते हैं, लेकिन स्वार्थ के कारण हम उन अवसरों का सदुपयोग नहीं कर पाते। यदि माता-पिता अपने बालक-बालिकाओं को सद्बुद्धि प्राप्त करने के लिए प्रेरित करें और उन्हें सन्मार्ग पर चलने की शिक्षा दें, तो वे निश्चित रूप से सुख की ओर अग्रसर होंगे। इसके विपरीत गलत मार्ग पर चलने से दुःख निश्चित है।
स्वामी जी ने बताया कि उन्होंने छह दर्शनों तथा 11 उपनिषदों एवं वेदों का अध्ययन किया है। वे देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों, विश्वविद्यालयों, व्यापारिक एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों में वैदिक प्रवचन एवं शंका समाधान से संबंधित संवाद एवं व्याख्यान दे चुके हैं। वे आध्यात्मिक शंका समाधान के विशेषज्ञ हैं तथा नेपाल, इंग्लैंड और दुबई में भी उनके कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं। भारत के प्रथम तर्कशास्त्री का पुरस्कार प्राप्त करने के बाद उन्होंने न्यायशास्त्र का 150 बार अध्ययन किया है।
तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत होटल पाणिग्रहण, रानी बाजार में 21, 22 एवं 23 अगस्त को प्रतिदिन शाम 5:45 बजे से रात 8:00 बजे तक संवाद कार्यक्रम आयोजित होंगे।
संवाद प्रेषक — रविंद्र भटनागर