
बीकानेर। रांगड़ी चाैक के श्री सुगनजी महाराज के उपासरे में मंगलवार काे साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने जैन धर्म का परम पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के पहले दिन मुख्य रूप से 5 आवश्यक कर्तव्यों की आराधना और श्रावक के 6 दैनिक कर्तव्यों के स्मरण व पालन पर विशेष बल दिया।
ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने कहा कि अहिंसा, भक्ति, क्षमा याचना, तपस्या, मंदिर यात्रा पांच प्रमुख कर्तव्याें में शामिल है। उन्हाेंने कहा कि 6 दैनिक कर्तव्याें में जिनेन्द्रपूजा के तहत प्रतिदिन प्रातःकाल भगवान जिनेंद्र देव की विधि-विधान से पूजा और वंदना करना, गुरु उपासना के तहत गुरुओं, साधु और साध्वी भगवंतों के पास जाकर उनकी सेवा और वंदना करना, जीवदया (सत्वानुकम्पा) के तहत संसार के किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाना और हर प्राणी पर दया भाव रखना, सुपात्र दान के तहत ज्ञान, आहार या औषधि के माध्यम से योग्य पात्र और मुनिराजों को दान देना, गुणानुराग के तहत अरिहंत भगवान और गुरुओं के गुणों के प्रति श्रद्धा और प्रेम का भाव रखना तथा स्वाध्याय (श्रुत भक्ति) के तहत भगवान के बताए गए आगम और धार्मिक शास्त्रों का निरंतर अध्ययन व मनन करना है। उन्हाेंने कहा कि पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व का पहला दिन आत्मचिंतन, अंतर्मुखी होने, खाद्य संयम और आत्मशुद्धि की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
बालाघाट नागाैर बीकानेर निवासी मनाेज खजांची ने बताया कि पयुर्षण पर्व का पहला दिन उत्तम क्षमा धर्म का दिन है पयुर्षण के सभी दिन हमारी वास्तविक अवस्था की ओर अग्रसर होने के प्रयोग के दिन होते हैं। वास्तव में पर्यूषण के दिनों में हमारे भीतर जो विकृतियां हैं उनको हटाना चाहिए। जैसे-जैसे हम उनको हटाते जाएंगे धर्म अपने आप हमारे भीतर प्रकट होता जाएगा।
ट्रस्ट के सहमंत्री मनीष नाहटा, काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया ने बताया कि इस अवसर पर संरक्षक रतनलाल नाहटा सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं माैजूद रहे। वहीं गुलगुलिया ने यह भी बताया कि उपासरे के पास ही महावीर भवन में आज भी बड़ी संख्या में कई श्रावक-श्राविकाओं ने पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के पहले दिन आत्म-निरीक्षण, संकल्प और संयम की शुरुआत के साथ एकासना (दिन में एक बार भोजन करना) जैसे तप का विशेष महत्व के तहत एकासना किया। एकासना का लाभ सुंदनलाल प्रदीप सेठी परिवार ने लिया।