बीकानेर। राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर में जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. राजेंद्र कुमार पुरोहित की गरिमामयी उपस्थिति में चित्रकला भवन में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं तथा देश की आजादी में उनके अतुलनीय योगदान से परिचित करवाना रहा।
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. राजेंद्र कुमार पुरोहित ने जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनजातीय समुदायों ने देश की आजादी के संघर्ष में अद्वितीय साहस, त्याग और बलिदान का परिचय दिया है। उनकी सांस्कृतिक विरासत और परंपराएं भारतीय समाज की अमूल्य धरोहर हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सुखाराम ने अपने संबोधन में जनजातीय गौरव के ऐतिहासिक पक्षों को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने वैदिक काल, मुगल काल, ब्रिटिश काल और आधुनिक भारत के विभिन्न ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए जनजातीय समाज के अमूल्य योगदान को रेखांकित किया। विभिन्न ऐतिहासिक ग्रंथों एवं महाकाव्यों के संदर्भों के माध्यम से उन्होंने आदिवासी समाज के संघर्ष, शौर्य और सांस्कृतिक चेतना की जानकारी दी।
डॉ. सुखाराम ने राजस्थान के संदर्भ में गोविंद गुरु और भगत आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए बताया कि जनजातीय समाज ने सामाजिक जागृति, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और उनके योगदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. सत्यनारायण जाटोलिया ने आयोजन की रूपरेखा एवं जनजातीय गौरव दिवस की श्रृंखला के उद्देश्यों की जानकारी दी। मंच संचालन सह-संयोजक डॉ. शशि बेसरवारिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूजा चौधरी ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के गौरवशाली अतीत, सांस्कृतिक पहचान, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिला।
