
बीकानेर। अहंकार एक ऐसा मायावी ठग है जो हमारी बुद्धि, शांति और विवेक को चुरा लेता है। जब तक यह भीतर बैठा है, तब तक इंसान सच्चाई और आत्मीयता का अनुभव नहीं कर सकता। इस ‘ठग रूपी अहंकार’ को अपने भीतर से निकालने के लिए साक्षी भाव अपनाएं, विनम्रता और कृतज्ञता का अभ्यास करें, ‘मैं’ और ‘मेरा’ के जाल से बाहर निकलें, दूसरों को सुनना और क्षमा करना सीखें।यह बात साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने शुक्रवार काे रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगन जी महाराज उपासरे में चातुर्मास के दाैरान नित्य प्रवचन में कही। उन्हाेंने कहा कि जैसे उबलते हुए पानी में कभी परछाई नहीं दिखती, वैसे ही अहंकार और क्रोध से भरे मन में कभी परमात्मा या सत्य का रूप नहीं दिखता। शांत हो जाइए, यह ठग अपने आप भाग जाएगा। इस अवसर पर चित्तलेहांजनाश्री जी म.सा., सुरक्षांजनाश्रीजी म.सा., साैम्यांजनाश्रीजी म.सा., चित्तखरांजनाश्रीजी म.सा. भी उपासरे में माैजूद रहीं।ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि आज बारह व्रताें में से पहला पूरा हुआ है और दूसरे व्रत के बारे में साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने अपने विचार रखे। उन्हाेंने बताया कि ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया, सहमंत्री मनीष नाहटा, ट्रस्टी संदीप मुसरफ चातुर्मास की विभिन्न व्यवस्थाएं देख रहे हैं।