पशुसेवा से राष्ट्रसेवा तक का संकल्प, राजुवास के 623 विद्यार्थियों को मिली उपाधि; 42 पदकों से मेधावी सम्मानित

बीकानेर 16 अक्टूबर। वेटरनरी विश्वविद्यालय के नवम् दीक्षांत समारोह में पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान के 623 छात्र-छात्राओं को उपाधियों और 2 कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 36 को स्वर्ण पदक तथा 2 रजत एवं 2 कांस्य पदक से अलंकृत किया गया। समारोह के प्रारम्भ में माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के नवम् दीक्षांत समारोह की सभी को बधाई दी और कहा की दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं बल्कि विद्यार्थी के नव जीवन में प्रवेश का दिन है। उन्होंने डिग्री एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय से प्राप्त शिक्षा को समाज एवं देश के विकास के लिए उपयोग कर विकसित भारत की संकल्पना को पूर्ण करने हेतु कहा। राज्यपाल महोदय ने बताया कि पशुचिकित्सा विज्ञान केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और कर्तव्य का संकल्प है। जब आप किसी पशु का उपचार करते हैं, तो आप केवल एक जीव का जीवन नहीं बचाते, बल्कि एक किसान की आशा, एक परिवार की आजीविका और समाज की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होने बताया की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हमारे यहां पशुपालन ही रहा है। अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण समुदायों को सतत् आजीविका प्रदान करने में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। माननीय राज्यपाल महोदय ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहते हुए सफलता को अर्जित करने हेतु प्रेरित किया। दुग्ध उत्पादन, चारा प्रबंधन, स्वच्छता एवं पशुधन की देखभाल में महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय है अतः विश्वविद्यालय को चाहिए कि महिला पशुपालको, किसानों एवं वंचित परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर अधिक से अधिक ध्यान दिया जाए। माननीय राज्यपाल महोदय ने कहा कि हमें पशुपालन की इस गौरवशाली परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए स्वदेशी गौवंश के संरक्षण, संवर्धन एवं उन्नयन को नई दिशा प्रदान करने हेतु अग्रसित होना होगा। उन्होंने राजस्थान के देशी गौवंश की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उनके संरक्षण एवं नस्ल सुधार हेतु अनुसंधान का महत्व बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं से पशुपालन एवं कृषि क्षेत्र में विकसित की जा रही तकनीकों का लाभ किसानों एवं पशुपालकों तक अधिक से अधिक पहुंचाए जाने हेतु निर्देशित किया।

समारोह के दीक्षांत अतिथि डॉ. नवीन कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे, (महाराष्ट्र) ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि मैं यह दीक्षांत समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह सीखने से नेतृत्व तक, ज्ञान का अनुप्रयोग है और एक विद्यार्थी से समाज व राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदानकर्ता बनने के परिवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि और पशुपालन अपार पारंपरिक ज्ञान तथा नई खोजों की संभावनाओं से समृद्ध क्षेत्र हैं अतः पशुचिकित्साकों को पशुपालकों द्वारा अपनाई जा रही पद्धतियों के सकारात्मक पहलुओं का विश्लेषण करते हुए, उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर निरंतर आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें पशु उत्पादों एवं तकनीकों के लिए आयातक ना होकर निर्यातक बनना होगा तभी हम विकसित भारत की संकल्पना को साकार कर पाएगे। डॉ. नवीन कुमार कि हमारा अनुसंधान एवं तकनीक देश के किसान एवं पशुपालक की पहुंच में सुलभ होना चाहिए तथा हमेें रोजगार सृजनकर्ता होकर पशुपालक की समस्या का समाधान खोजने हेतु प्रेरित रहना चाहिए एवं नवीन स्टार्ट-अप में पशुचिकित्सा विज्ञान के ज्ञान को बढ़ाने हेतु प्रेरित किया। डॉ. नवीन ने पशुओं में नित नई बीमारियों और वैश्विक जुनोसिस के समाधान हेतु वैक्सीन एवं रोग निदान शोध एवं तकनीकी उत्पादन के लिए बल दिया।

कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने अपने स्वागत उद्बोधन में बताया कि नवम् दीक्षांत समारोह के कुल 451 छात्र-छात्राओं को पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान में स्नातक, 11 छात्र-छात्राओं को स्नातक डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, 141 को स्नातकोत्तर एवं 20 को विद्यावाचस्पति सहित कुल 623 उपाधियां प्रदान की गई है तथा 42 मेधावी छात्र-छात्राओं को विभिन्न पदकों से सम्मानित किया गया है। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया और विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा, अनुसंधान व प्रसार एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संक्षिप्त ब्योरा प्रस्तुत किया। कुलगुरु ने विश्वविद्यालय द्वारा पशुपालकों को प्रदान की जाने वाली अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं का जिक्र किया एवं आई.सी.ए.आर एवं राज्य बजट से स्वीकृत शोध परियोजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की। राज्य के पशु पालकों हेतु कौशल विकास एवं प्रसार कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी भी दी। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने दीक्षा प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विद्यार्थियों के शैक्षणिक उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं विश्वविद्यालय को प्राप्त होने वाले 5 पेटेटों का भी जिक्र किया। कुलगुरु द्वारा दीक्षा प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ उनकों राष्ट्र प्रगति में सार्थक भागीदारी हेतु भी प्रेरित किया।

दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल के प्रमुख विशेषाधिकारी राजकुमार सागर, ए.डी.सी. विनय कुमार, प्रबंध मण्डल के सदस्य डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, डॉ. गोविन्द सहाय शुक्ला, जगमाल सिंह राईका, करण सिंह राजपुरोहित, मधु कुमावत, प्रो. बी.एन. श्रृंगी, प्रो. राजेश कुमार धूड़िया, कुलसचिव पंकज शर्मा, डॉ. इन्द्रजीत सिंह, डॉ. गोविन्द सहाय गौतम, उपस्थित रहे। विशेष अतिथियों में पूर्व विधायक, बीकानेर (पश्चिम) बी.डी. कल्ला, स्वामी केशवानन्द, राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु प्रो. राजेन्द्र बाबु दुबे, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई, तकनीकी विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग, जिला प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार एवं मीडियाकर्मी, सेवानिवृत शिक्षक एवं अधिकारी, विश्वविद्यालय के डीन-डायरेक्टर, शिक्षक, कर्मचारी, दीक्षांत विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह को विश्वविद्यालय की वेबसाइट, फेसबुक पेज व यूट्यूब पर सीधा प्रसारित किया गया। समारोह के प्रारम्भ में विश्वविद्यालय के 1 राज. आर. एण्ड वी. एन.सी.सी., बीकानेर के घोड़ो द्वारा माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय का एस्कॉर्ट करके अगवानी की गई।

विभिन्न प्रकाशनों का हुआ विमोचन एवं लोकार्पण

दीक्षांत समारोह के उपलक्ष पर माननीय राज्यपाल द्वारा वेटरनरी महाविद्यालय, बीकानेर में आई.सी.ए.आर., नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित नवनिर्मित कन्या छात्रावास का लोकार्पण भी किया गया। माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय द्वारा निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया द्वारा प्रकाशित पुस्तिका “राजुवासः एट ए ग्लांस“ का विमोचन किया गया। निदेशक पी.एम.ई. प्रो. मनीषा माथुर द्वारा प्रकाशित “वार्षिक प्रतिवेदन” का विमोचन किया गया। समन्वयक जन संपर्क प्रकोष्ठ राजुवास, बीकानेर डॉ. देवी सिंह एवं डॉ. लोकेश टाक द्वारा प्रकाशित विश्वविद्यालय न्यूज लेटर के नवीन अंक का विमोचन किया गया एवं राजुवास वर्चुअल टूर का विमोचन किया गया।

स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी

दीक्षांत समरोह में शिक्षा में सर्वाेत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर यदुवीर सिंह और संतोष मीना को कुलाधिपति स्वर्ण पदक से अलंकृत किया गया। स्नातकोत्तर शिक्षा में सर्वाेत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर एकता यादव, पूनम सैनी, गरिमा बागोड़, भारती यादव, चारू रोत, सत्यम प्रकाश, शिवानी पुरोहित, नवीन कुमार, अर्चना फौजदार, साक्षी राठौड़, पूजा सकरवाल, अजय कुमार, यामिनी कल्ला, सक्षम मंडावत, विक्रम जाट, मुस्कान टाक, निर्मला, संतोष मीना, ममता, मितुल त्रिपाठी, कीर्ति पूर्वा, इशान आसोपा, तनु शर्मा, शिप्रा, सुमित्रा खिचेर और अर्जुन सिंह भदौरिया को स्वर्ण पदक से अलंकृत किया गया। विद्यावाचस्पति में पल्लबी दास, विपिन चंद्रा, कुसुमलता झाझरिया, रोहिताश कुमार, कविता जैदिया, देवेन्द्र सिंह व मोहन लाल शर्मा को स्वर्ण पदक से अलंकृत किया गया। पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान स्नातक में जोनाथन मोसेस जॉर्ज को स्वर्ण पदक, अक्षय राठौड को रजत पदक, खुशी हाड़ा को कांस्य पदक से अलंकृत किया गया। डेयरी प्रौद्योगिकी में यश पंवार को स्वर्ण पदक, भुवनेश चौहान को रजत पदक, रवीन्द्र कंडोल को कांस्य पदक से अलंकृत किया गया। खाद्य प्रौद्योगिकी में तमन्ना चौधरी को स्वर्ण पदक से अलंकृत किया गया।

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