
बीकानेर,3 सितंबर। बीकानेर तेरापंथ भवन में युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री साध्वी मंजू प्रभा जी एवं साध्वी कुंथु श्री जी के सानिध्य में तपस्वी भाई बहनों का अभिनंदन किया गया l युवक मयंक बोथरा के 11 की तपस्या, सिद्धि बोथरा के 8 की तपस्या और प्रेमलता जैन के 8 की तपस्या कर लाभ कमाया है l साध्वी कुंथु श्री जी ने फरमाया आगम में अहिंसा, संयम तप को मंगल बताया गया है तपस्या एक सुरक्षा कवच है जो इस कवच को पहन लेता है वह अनेक खतरों से बच जाता है तपस्या के द्वारा चेतना के स्तर पर उभरने वाले रोगों का शमन करता है l आंतरिक स्वास्थ्य को प्राप्त किया जा सकता है l तपस्या का उद्देश्य क्या होना चाहिए । जीवन जागरण, आत्म शोधन ,बंधन मुक्ति l इसके साथ-साथ मानसिक एकाग्रता, इंद्रिय शमन और स्वभाव परिवर्तन भी तपस्या के द्वारा फलित होते हैं l
शास्त्रकार ने कहा है इहलोक के निमित्त तप नहीं करना चाहिए, परलोक के निमित्त तप नहीं करना चाहिए l कीर्ति, वर्ण, शब्द यश के निमित्त तप नहीं करना चाहिए l निर्जरा की अतिरिक्त अन्य किसी उद्देश्य से तप नहीं करना चाहिए l तापयती अष्ट प्रकार कर्म इति तप जो आठ कर्मों को तपाता है वह कर्म है तपस्या से आत्मा पवित्र होती है करोड़ों भवों को संचित कर्म जीवन होते हैं तपस्वी भाई बहनों ने संवत्सरी के बाद के समय में भी तपस्या करके हिम्मत दिखलाई है l तप है महकता चंदन तपस्वी को देवता करते वंदन l
तपस्वियों के अभिनंदन में उनके पारिवारिक जनों ने सामूहिक गीत की प्रस्तुति दी l गणेश बोथरा, चारू झाबक ने अभिनंदन में अपने विचारों की प्रस्तुति दी l साध्वी वृंद ने सामूहिक गीत तपसन जी की तपस्या देखो सुर नर शीष झुकाए को मधुर स्वर दिया l महिला मंडल की अध्यक्ष दीपिका बोथरा ने अपने विचार व्यक्त किए l