
बीकानेर, 22 जून। बीकानेर पुलिस की साइबर थाना टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी से प्राप्त रकम को बैंक खातों के माध्यम से अपराधी गिरोहों तक पहुंचाने वाले ‘रोहित गोदारा गैंग’ के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के बैंक खातों में देशभर से हुई साइबर ठगी की राशि जमा होती थी, जिसे हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए गैंग के अन्य सदस्यों तक पहुंचाया जाता था।
पुलिस अधीक्षक बीकानेर के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत साइबर थाना प्रभारी शालिनी बजाज (आरपीएस) के सुपरविजन तथा निरीक्षक रमेश कुमार सर्वटा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संदीप स्वामी (32) निवासी रामपुरा बस्ती और मुकेश बिश्नोई (28) निवासी रामपुरा बस्ती, बीकानेर के रूप में हुई है।
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी साइबर ठगी गिरोह के साथ मिलकर अपने तथा गैंग के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में ठगी की रकम प्राप्त करते थे। इसके बाद “फ्लोसिस पे” नामक एप्लिकेशन के क्लोन टूलकिट और हवाला नेटवर्क के जरिए राशि को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर अपराधी गिरोह तक पहुंचाया जाता था। इसी रकम का उपयोग विभिन्न राज्यों में आपराधिक गतिविधियों और अवैध वसूली के लिए किया जाता था।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के बैंक खातों पर 23 एनसीआरपी (NCRP) शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें करीब 50 लाख रुपये की साइबर ठगी की राशि का लेनदेन सामने आया है। गिरोह के अन्य सदस्यों के बैंक खातों की भी गहन जांच की जा रही है।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि संदीप स्वामी के खिलाफ मारपीट, धोखाधड़ी, अपहरण, जान से मारने की धमकी और अवैध हथियार रखने सहित चार आपराधिक मामले, जबकि मुकेश बिश्नोई के खिलाफ मारपीट, जान से मारने की धमकी और अवैध हथियार से संबंधित एक मामला दर्ज है।
बीकानेर पुलिस की अपील
बीकानेर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि कमीशन या लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। ऐसा करना गंभीर अपराध है और संबंधित व्यक्ति भी आपराधिक साजिश का सह-आरोपी बन सकता है।
यदि कोई व्यक्ति आपके दस्तावेजों से बैंक खाता खुलवाने का प्रलोभन दे तो तत्काल नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें। साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
बीकानेर पुलिस ने कहा कि साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके माध्यम से संगठित अपराध और आपराधिक गैंगों को आर्थिक सहायता भी पहुंचाई जा रही है। यह कार्रवाई ऐसे नेटवर्क पर बड़ी चोट मानी जा रही है।