
बीकानेर, 7 अगस्त। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पंडित दीनदयाल उपाध्याय (पीबीएम) अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और गंभीर मामलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। हाल ही में एक प्रसूता की मौत और दूसरी के गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर भर्ती होने की घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
पीबीएम अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 5 अगस्त को चूरू मेडिकल कॉलेज से एक गंभीर प्रसूता को बीकानेर पीबीएम अस्पताल रेफर किया गया था। अस्पताल पहुंचने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। जानकारी के अनुसार मृतक प्रसूता का नाम संतोष बताया जा रहा है।
अधीक्षक डॉ. घीया ने बताया कि दूसरी प्रसूता इमरती का उपचार पीबीएम अस्पताल में जारी है। फिलहाल वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। हालांकि चिकित्सकों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है और उसे स्वस्थ करने के लिए आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। इमरती को नोखा जिला अस्पताल से गंभीर अवस्था में पीबीएम रेफर किया गया था। बताया जा रहा है कि वह मूल रूप से नागौर जिले की निवासी है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों भी पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर व्यापक विवाद हुआ था। इन घटनाओं के बाद अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन हुए और मामले ने प्रदेशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान के चिकित्सा मंत्री भी बीकानेर पहुंचे थे। इस दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए थे।
पीबीएम अस्पताल संभाग का सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल है, जहां बीकानेर के अलावा चूरू, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और जैसलमेर सहित आसपास के जिलों से गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में लगातार सामने आ रहे गंभीर मामलों ने अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था, रेफरल सिस्टम और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दोनों प्रसूताएं पहले से ही अत्यंत गंभीर स्थिति में अन्य अस्पतालों से रेफर होकर आई थीं और चिकित्सकों ने चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार पूरा प्रयास किया। वहीं, आमजन और विभिन्न सामाजिक संगठनों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन इमरती के उपचार पर विशेष निगरानी बनाए हुए है और चिकित्सकों की टीम उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।यदि चाहें तो इसे न्यूज़ चैनल स्क्रिप्ट, वेब पोर्टल स्टोरी या अखबार शैली में भी तैयार कर सकता हूँ।