
बीकानेर। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर में नव नियुक्त कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कार्यभार संभालने के साथ ही विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, रोजगारोन्मुखी शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में नई पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से कई नए पाठ्यक्रम एवं योजनाएं शुरू की जा रही हैं।
कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में अपने आगामी तीन वर्षीय कार्यकाल की कार्ययोजना साझा करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में एमएससी डाटा साइंस, फॉरेंसिक साइंस, मनोविज्ञान एवं सर्टिफिकेट इन ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही अंग्रेजी विभाग के माध्यम से विदेशी भाषा पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जाएंगे।
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस से मिलेगा विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान
कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत अनुभवी चिकित्सकों, पेशेवरों, उद्योग विशेषज्ञों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को विद्यार्थियों से जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें किताबों के साथ-साथ वास्तविक क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव भी मिल सके।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालय में बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। पाठ्यक्रमों में इंटर्नशिप एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
घर बैठे ऑनलाइन कोर्स से हासिल कर सकेंगे सर्टिफिकेट
कुलगुरु ने विद्यार्थियों से SWAYAM पोर्टल पर अधिक से अधिक पंजीयन करने का आह्वान किया। इसके माध्यम से विद्यार्थी घर बैठे विभिन्न निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम कर प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकेंगे। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को इन ऑनलाइन अवसरों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास करेगा।
डिजिटल होगा विश्वविद्यालय, बनेगा चैटबॉट
विश्वविद्यालय में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देते हुए ऑनलाइन विद्यार्थी शिकायत निवारण केन्द्र स्थापित किया जाएगा। इससे विद्यार्थी घर बैठे अपनी समस्याएं दर्ज करवा सकेंगे और उनके समयबद्ध समाधान की व्यवस्था की जाएगी।
इसके अलावा विश्वविद्यालय का अपना चैटबॉट भी तैयार करवाया जा रहा है, जो टेक्स्ट अथवा आवाज के माध्यम से विद्यार्थियों के सवालों के जवाब देने में सक्षम होगा।
संबद्ध कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी मिलेंगे ई-रिसोर्स
प्रो. बिश्नोई ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे संबद्धता से जुड़े मामलों का समयबद्ध तरीके से ऑनलाइन निस्तारण किया जा सके। विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों को समय पर डिजिलॉकर पर अपलोड करवाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थी भी विश्वविद्यालय परिवार का हिस्सा हैं। इसी उद्देश्य से केंद्रीय पुस्तकालय में उपलब्ध ई-रिसोर्सेज को संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करवाने की योजना तैयार की जा रही है।
मीडिया सेंटर के माध्यम से विशेषज्ञों के व्याख्यान ऑनलाइन होंगे उपलब्ध
विश्वविद्यालय में मानव संसाधन विकास मीडिया केन्द्र स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से शिक्षकों के निरंतर क्षमता विकास के साथ विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों एवं विषय विशेषज्ञों के रिकॉर्डेड वीडियो उपलब्ध करवाए जाएंगे।
विश्वविद्यालय के शिक्षकों की उपलब्धियों एवं प्रकाशनों का विशेषज्ञ डाटा बेस भी तैयार करवाया जाएगा, जिसका उपयोग राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों द्वारा किया जा सकेगा।
नए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए मान्यता की प्रक्रिया
कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में एमबीए, एमसीए, बीसीए, बीबीए, एमएड, एमपीएड, बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीएससी डाटा साइंस, बीएससी क्लिनिकल साइकोलॉजी, बी.फार्मा एवं बीएससी नर्सिंग सहित विभिन्न रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए संबंधित नियामक संस्थाओं से पंजीयन एवं मान्यता की कार्यवाही की जाएगी।
खाली पदों पर भर्ती और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से एमओयू
प्रो. बिश्नोई ने कहा कि विश्वविद्यालय में रिक्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक पदों पर चयन एवं पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ एमओयू किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन, शोध, प्रशिक्षण एवं रोजगार के अधिक अवसर मिल सकें।
दिसंबर में प्रस्तावित दीक्षांत समारोह
विश्वविद्यालय के कुलसचिव यशपाल आहूजा ने बताया कि आगामी दीक्षांत समारोह माननीय राज्यपाल की सुविधानुसार दिसंबर 2026 में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। समारोह में परीक्षा वर्ष 2025 के लगभग 1.27 लाख विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी। साथ ही 136 विद्या-वाचस्पति की उपाधियां भी प्रदान की जाएंगी।
मीडिया प्रभारी डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई की पहल पर विश्वविद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने के साथ जैव विविधता के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
प्रेसवार्ता में संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो. अनिल कुमार छंगाणी, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजाराम चोयल एवं निदेशक आईक्यूएसी डॉ. धर्मेश हरवानी सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी उपस्थित रहे।