
बीकानेर। साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने शुक्रवार काे कहा कि अपने अंदर अहंकार को पालना मनुष्य के विनाश का सबसे बड़ा कारण बनता है। अहंकार से बचना हाे ताे विनम्रता ही मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है। यह आत्मा को प्रकाशित करती है। यह जीवन और शरीर नश्वर है, इसलिए किसी भी पद, धन या सुंदरता का गर्व व्यर्थ है। इसके लिए जरुरी यही है कि हर व्यक्ति में कोई न कोई खूबी होती है। खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझना छोड़ दें।
रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगन जी महाराज के उपासरे में चातुर्मास विराजित साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने नित्य प्रवचन में यह बात कही। उन्हाेंने कहा कि गलती हर इंसान से होती है और जब इंसान अपनी गलती को दिल से समझ लेता है तथा उसका अहसास करता है, तो उसे माफ किया जा सकता है। जब व्यक्ति को अपनी भूल का वास्तविक ज्ञान हो जाता है और वह दोबारा वैसी गलती न करने का संकल्प लेता है, तो रिश्ते और भी मजबूत होते हैं। उन्हाेंने यह भी कहा कि सच्चे दिल से मांगी गई माफी इंसान के बड़े संस्कारों को दर्शाती है।
साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने कहा कि वन्दन केवल शरीर या तन को झुकाना नहीं है, बल्कि यह मन और अहंकार को विनम्र करने की प्रक्रिया है।
उपासरा ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि इस अवसर पर उपासरे में साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. के साथ चित्तलेहांजनाश्री जी म.सा., सुरक्षांजनाश्रीजी म.सा., साैम्यांजनाश्रीजी म.सा., चित्तखरांजनाश्रीजी म.सा. भी चातुर्मास पर विराजित है।