
बीकानेर, 21 अगस्त। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केन्द्र में मासिक तकनीकी कार्यशाला शुक्रवार को आयोजित की गई अतिरिक्त निदेशक कृषि विस्तार हिरेन्द्र शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि आरकेवीवाई भगवान सहाय यादव व तथा क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ एच एल देशवाल अन्य अधिकारियों वैज्ञानिकों ने इस कार्यशाला में भाग लिया । शर्मा ने कहा कि जिले में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के माध्यम से उर्वरक वितरण की व्यवस्था के क्रम में आदान विक्रेताओं व
प्रगतिशील कृषकों को प्रशिक्षण दिया जाए। जिले में उद्यानिकी गतिविधियों के क्रियान्वयन की व्यापक सम्भावना है। उद्यानिकी अधिकारी उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों को प्राथमिकता से दिया जाना सुनिश्चित किया जाए। जिले में सब्जी उत्पादन संभावना को ध्यान में रखते हुए सपोर्ट सिस्टम से सब्जी उत्पादन पर देय अनुदान से कृषक को लाभान्वित किया जाना अधिकारियों की प्राथमिकता हो। मासिक तकनीकी कार्यशाला में माह अगस्त में की गए कृषि क्रियाओं की प्रगति पर समीक्षा की गई। आगामी माह सितम्बर में कृषकों द्वारा की जाने वाली कृषि व उधानिकी तकनीकी पर विस्तार से चर्चा की गई। कृषि वैज्ञानिक प्रो. एस पी सिंह, डॉ एच एल देशवाल, डॉ बीडीएस नाथावत, डॉ राजेन्द्र राठौड़ ने विभिन्न खरीफ फसल प्रबन्धन कीट व व्याधि प्रबन्धन व पैकेज आफ प्रेक्टसेज खरीफ पर विस्तार से चर्चा की।खरीफ फसलों में कातरा कीट व्याधि प्रकोप की रोकथाम के उपायों पर व्यापक चर्चा हुई। आर्थिक हानि स्तर से अधिक प्रकोप होने पर फसल उत्पादन में नुकसान पर रासायनिक कीटनाशी के उपयोग का सुझाव दिया।विश्वविद्यालय वैज्ञानिक गण द्वारा विभिन्न खरीफ फसलों में कीट व्याधि नियंत्रण के विभिन्न उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया। लौह तत्व की कमी के कारण खरीफ फसलों में पीलापन की समस्या के लिए फेरस सल्फेट 5 प्रतिशत व 1 प्रतिशत सिट्रिक अम्ल का 500 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें। कार्यशाला में कृषि विभागीय अधिकारी संयुक्त निदेशक मदनलाल, धर्मवीर डूडी, जयदीप दोगने, प्रेमाराम, राजकुमार कुल्हरि, बी एल डाबला, डॉ मानाराम जाखड़ व सहायक निदेशक उद्यान मुकेश गहलोत, रधुवर दयाल सुथार, राजूराम डोगीवाल, राम किशोर मेहरा, सुभाष विश्नोई, प्रदीप चौधरी, राजेश गोदारा, रामनिवास चौधरी, महेंद्र प्रताप उपस्थित रहे।