श्रावण मास में शिव आराधना से खुलते हैं सौभाग्य और मोक्ष के द्वार : पंडित प्रभाकर चक्रवर्ती शर्मा

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नई दिल्ली। सनातन धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना का सर्वोत्तम काल माना गया है। देशभर के शिवालयों, ज्योतिर्लिंगों एवं तीर्थस्थलों पर इस पावन मास में लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य, पंचांगकर्ता एवं आध्यात्मिक प्रवक्ता पंडित प्रभाकर चक्रवर्ती शर्मा ने बताया कि श्रावण मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप, भक्ति एवं मोक्ष साधना का दिव्य अवसर है।

उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, आगम, पुराण और स्मृति ग्रंथों में श्रावण मास की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। विशेष रूप से शिवपुराण, स्कन्दपुराण, लिंगपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण तथा धर्मशास्त्रों में श्रावण सोमवार का व्रत, रुद्राभिषेक एवं शिवलिंग पूजन अत्यंत पुण्यदायक बताया गया है।

पंडित शर्मा ने बताया कि समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए कालकूट (हलाहल) विष का पान किया, तब देवताओं ने उन्हें शीतल रखने के लिए गंगाजल, दुग्ध, दधि एवं अन्य पवित्र द्रव्यों से अभिषेक किया। यही परंपरा आगे चलकर श्रावण मास के जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के रूप में प्रतिष्ठित हुई।

उन्होंने बताया कि श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दिन व्रत, उपवास, शिवलिंग अभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप, रुद्रपाठ तथा “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

शास्त्रों के अनुसार इस व्रत से—आयु में वृद्धि होती है, रोग एवं भय दूर होते हैं, विवाह में आने वाली बाधाएँ समाप्त होती हैं, संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है, ग्रहदोष शांत होते हैं, परिवार में सुख-समृद्धि आती है, अंततः शिवकृपा से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

पंडित प्रभाकर चक्रवर्ती शर्मा के अनुसार विभिन्न पुराणों में श्रावण मास की महिमा शिवपुराण, स्कन्दपुराण, लिंगपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण के बारे में बताया।

श्रावण सोमवार का व्रत मनोकामना सिद्धि, अकाल मृत्यु से रक्षा तथा आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ साधन माना गया है।

पंडित शर्मा ने श्रद्धालुओं को पूजन विधि अपनाने का सुझाव देते हुए बताया कि ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, गणेश एवं गुरु का स्मरण करें, शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें, पंचामृत से रुद्राभिषेक करें, बिल्वपत्र, धतूरा, आक, चंदन एवं पुष्प अर्पित करें, रुद्राध्याय, शिवमहिम्न स्तोत्र, शिवताण्डव स्तोत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें, कम से कम 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें, सायंकाल दीप, धूप एवं आरती के साथ पूजा सम्पन्न करें। साथ ही उन्होंने बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों का दर्शन किसी भी समय पुण्यदायक है, किन्तु श्रावण मास में इसका महत्व अनेक गुना बढ़ जाता है।

 

उज्जैन महाकालेश्वर का विशेष महत्व

 

पंडित प्रभाकर चक्रवर्ती शर्मा ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। महाकाल स्वयं काल के भी अधिपति हैं। श्रावण मास में महाकालेश्वर के दर्शन एवं रुद्राभिषेक का महत्व असाधारण माना गया है।

उन्होंने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में प्रातःकाल होने वाली भस्म आरती तथा श्रावण सोमवार का अभिषेक विशेष पुण्यदायक माना जाता है। श्रद्धा एवं नियमपूर्वक दर्शन करने वाले भक्तों को आयु, आरोग्य, यश, आध्यात्मिक शक्ति तथा संकटों से रक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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