
बीकानेर। रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगन जी महाराज के उपासरे में साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने मंगलवार काे कहा कि जैन कुल में जन्म लेना और जिन शासन (जैन धर्म) का मिलना बहुत ही दुर्लभ और सौभाग्य की बात मानी जाती है। घर के कार्यों से निवृत्त होकर, स्नान आदि से पवित्र होकर ध्यान और स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन) में लीन होना आत्मा के कल्याण का सबसे उत्तम मार्ग है।
श्री सुगन जी महाराज के उपासरे में नित्य प्रवचन में साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने कहा कि सच्चे गुरु का मार्गदर्शन मिलने पर ही परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्हाेंने कहा कि जिस प्रकार अंधकार में दीपक रास्ता दिखाता है, उसी प्रकार गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ईश्वर प्राप्ति का मार्ग दिखाते हैं। सच्चे गुरु के पास जाकर विनम्रता, सेवा और निष्ठावान प्रश्न पूछने से ही दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है। लेकिन उससे पहले जब साधक के मन में परमात्मा को पाने की सच्ची तड़प और जिज्ञासा जागती है, तो ईश्वर स्वयं उसके लिए योग्य गुरु का प्रबंध कर देते हैं।
उपासरा ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि प्रवचन में चित्तलेहांजनाश्री जी म.सा., सुरक्षांजनाश्रीजी म.सा., साैम्यांजनाश्रीजी म.सा., चित्तखरांजनाश्रीजी म.सा. भी उपासरे में माैजूद रहे। उन्हाेंने बताया कि ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया, सहमंत्री मनीष नाहटा, ट्रस्टी संदीप मुसरफ चातुर्मास की विभिन्न व्यवस्थाएं देख रहे हैं।