बीकानेर। श्रीराम कला मंदिर संस्थान एवं रोटरी क्लब रॉयल्स बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर स्थित रामलीला मैदान में भव्य रामलीला का मंचन किया जा रहा है। रामलीला की चतुर्थ रात्रि का शुभारंभ भगवान गणेशजी की आरती के साथ हुआ। इस दौरान भगवान श्रीराम के वनवास, मंथरा-कैकेयी संवाद और राजा दशरथ-कैकेयी के बीच हुए संवादों का प्रभावशाली मंचन किया गया।
संस्थान के अध्यक्ष गिरिराज जोशी ने बताया कि रामलीला में कैकेयी के मन परिवर्तन से लेकर भगवान श्रीराम के वनगमन तक के प्रसंग को कलाकारों ने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कैकेयी के कहने पर राजा दशरथ की व्याकुलता और भगवान श्रीराम का पिता के वचन की मर्यादा रखते हुए वन जाने का निर्णय दर्शकों के लिए भावुक क्षण रहा। भगवान श्रीराम अपने छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी माता सीता के साथ वन की ओर प्रस्थान करते हैं। इस दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
संवादों ने जीवंत किया दशरथ-कैकेयी प्रसंग
मंचन के दौरान कैकेयी और राजा दशरथ के बीच हुए संवादों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से कैकेयी की जिद, राजा दशरथ की विवशता और श्रीराम के त्याग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। संवादों और अभिनय के माध्यम से रामायण के इस महत्वपूर्ण प्रसंग की मार्मिकता को साकार किया गया।
संस्थान के संरक्षक गोपाल अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समाजसेवी राजेश चूरा, रोटरी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ब्रजमोहन अग्रवाल, रोटरी क्लब रॉयल्स बीकानेर के अध्यक्ष विपिन लड्ढा, उमेश पुरोहित, विमल छंगाणी और महेंद्र जोशी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
इन कलाकारों ने निभाई विभिन्न पात्रों की भूमिका
रामलीला के सचिव अभिराम दंतगौड़ ने बताया कि मंचन में राजा दशरथ की भूमिका मक्खन जोशी, भगवान श्रीराम की भूमिका गिरिराज जोशी ललन, लक्ष्मण की भूमिका साहिल रंगा, माता सीता की भूमिका प्रशांत आचार्य, कौशल्या की भूमिका नकुल आचार्य, कैकेयी की भूमिका सौरभ शर्मा, सुमित्रा की भूमिका ललित, गुरु वशिष्ठ की भूमिका शिवम उपाध्याय, मंत्री की भूमिका नीलेश चतुर्वेदी तथा सुमंत्र की भूमिका मदन आचार्य ने निभाई।
कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम की मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया गया।
