सहजन आधारित कृषि प्रणाली से किसानों को मिलेगा पोषण, आर्थिक सुरक्षा और रोजगार का अवसर

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बीकानेर, 10 अगस्त। जिले में सतत एवं आर्थिक विकास के लिए सहजन आधारित कृषि प्रणाली विषय पर चल रही नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के तहत तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को काजरी के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बीकानेर के सभागार में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय द्वारा ‘लैंड फॉर लाइफ अवार्ड’ से पुरस्कृत डूंगर कॉलेज के प्रोफेसर

डॉ. श्याम सुंदर ज्याणी एवं डॉ. सुधीर कुमार, अध्यक्ष, केंद्रीय दलहन अनुसंधान संस्थान, बीकानेर की गरिमामय उपस्थिति में किया गया।

 

इस अवसर पर डॉ. ज्याणी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे भोजन को संतुलित आहार युक्त बनाने के लिए सहजन का दैनिक उपयोग आवश्यक है। ‘सुपर फूड’ के नाम से जाना जाने वाला सहजन पोषण एवं औषधीय सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि सहजन एक बहुउपयोगी फसल है, जिसका उपयोग मानव पोषण, पशुपालन, कृषि तथा विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।

 

डॉ. सुधीर कुमार ने सहजन को बहुउपयोगी वृक्ष बताते हुए कहा कि सहजन के विभिन्न उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर रोजगार सृजन के साथ-साथ पोषण एवं आर्थिक सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सहजन के औषधीय गुणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मिट्टी को भी उपजाऊ बनाने में सहायक है।

 

परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बी.के. बेवल ने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार सहजन में शरीर की 100 से अधिक बीमारियों को दूर करने की क्षमता बताई गई है। यह वात एवं कफ दोष को नियंत्रित करने में सहायक है। सहजन की पत्तियां एवं फल पोषक तत्वों से भरपूर हैं तथा इसके नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

 

उन्होंने बताया कि सहजन की सूखी पत्तियों के पोषण मूल्य पर नजर डालें तो इनमें दूध से लगभग चार गुना अधिक कैल्शियम, संतरे से सात गुना अधिक विटामिन-सी, गाजर से चार गुना अधिक विटामिन-ए तथा पालक से तीन गुना अधिक आयरन पाया जाता है। ये पोषक तत्व शरीर को बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं, रक्त की कमी दूर करने, आंखों की रोशनी बनाए रखने तथा हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक हैं।

 

*700 से अधिक किसानों को दिया जा चुका है प्रशिक्षण*

 

काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ बीरबल मील ने बताया कि प्रशिक्षण में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से 50 किसान भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 सहजन के पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। नाबार्ड की सहभागिता से काजरी, बीकानेर में संचालित इस परियोजना के तहत अब तक 700 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षित किसानों में से 250 किसानों के खेतों में अब तक 2.5 लाख से अधिक सहजन के पौधे लगाए जा चुके हैं।

 

*जलवायु परिवर्तन के दौर में सहजन टिकाऊ कृषि का प्रभावी माध्यम*

 

काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरतन पंवार ने बताया कि बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में सहजन केवल एक पौधा नहीं, बल्कि पृथ्वी और मानव जाति दोनों के लिए एक सार्थक एवं शक्तिशाली सुरक्षा कवच सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सहजन भविष्य का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है।

 

कार्यक्रम में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री मूल सिंह गहलोत एवं डॉ. सीताराम जाट ने भी सहयोग किया।

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