डूंगर कॉलेज के अंग्रेजी विभाग एवं शोध-विकास प्रकोष्ठ का नवाचार पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित

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बीकानेर। राजकीय डूंगर महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग और शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में ‘शोध उत्कृष्टता: उपकरण एवं तकनीक’ विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला गुरुवार को संपन्न हुई। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को शोध पद्धति, साहित्यिक समीक्षा, संदर्भ प्रबंधन, साहित्यिक चोरी से बचाव के प्रति जागरूक करना था। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. राजेंद्र कुमार पुरोहित ने शोध के व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक पक्ष की जानकारी दी। अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. दिव्या जोशी ने साहित्य समीक्षा की तकनीकों और डॉ. सोनू शिवा ने मानविकी में शोध की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। डॉ. शशिकांत ने सुव्यवस्थित शोध-प्रस्ताव (सिनॉप्सिस) तैयार करने की विधियां और डॉ. महेंद्र थोरी ने साहित्य में सैद्धांतिक ढांचों के उपयोग पर सत्र लिया।

डॉ. एस.के. वर्मा ने संदर्भ प्रबंधन उपकरणों का उपयोग और डॉ. एन. भोजक ने साहित्यिक चोरी और शोध नैतिकता पर विचार रखे।

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने शोध प्रक्रियाओं की गहरी समझ और व्यावहारिक कौशल के बारें में जाना। प्रतिभागियों ने शोध उद्देश्यों को स्पष्ट करने, साहित्य समीक्षा तैयार करने और शोध में नैतिकता बनाए रखने में आत्मविश्वास की वृद्धि की। कार्यशाला का समापन डॉ. एस.डी. व्यास की ओर से संचालित खुले मंच पर हुआ, जहां प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए।

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