10 जनवरी को जिला-स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आंदोलन की देशव्यापी अभियान मनरेगा बचाओ संग्राम की औपचारिक शुरुआत

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सच राजस्थान न्यूज़, बीकानेर,अनूपगढ़ विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी जिला प्रभारी शिमला नायक ने कहा कि ग्राम पंचायत की शक्तियां ठेकेदारों को सौंपी जा रही हैं। पहले मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों को अपने गाँव के विकास के लए विभिन्न कार्योें में मज़दूरों को नियोजित करने का अधिकार था। विकास कार्यों की योजना और सिफारिश ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं द्वारा की जाती थी। ठेकेदारों पर प्रतिबंध था-मनरेगा का काम गाँव के विकास के लिए होता था। मज़दूरों को स्थानीय मनरेगा मेट्स का सहयोग मिलता था। अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद सभी फैसले दल्ली से रिमोट कंट्रोल के ज़रये लिए जायेगे। विकास परियोजनाएँ कुछ सीमत श्रेणयों तक सिमट जाएँगी और योजना से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय मोदी सरकार लेगी। ग्राम पंचायत अपना अधिकार खो देगी और केवल मोदी सरकार के आदेशों को लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएगी। ठेकेदारों को लाया जाएगा, और मज़दूरों को ठेकेदारों की परियोजनाओं के लए लेबर सप्लाई में बदल दया जाएगा। स्थानीय कार्यों के लिए मनरेगा मेट्स नहीं होंगे।

जिला कांग्रेस कमेटी देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत काम तय न्यूनतम मज़दूरी पर दिया जाता था, जिसमें हर साल बढ़ोतरी की जाती थी। साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था, ताकि ज़रूरत पड़ने पर परिवारों के पास कमाई का विकल्प हमेशा मौजूद रहे। अब मोदी सरकार के इन बदलावों के तहत मज़दूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी, न तो न्यूनतम मज़दूरी की कोई गारंटी होगी और न ही हर साल बढ़ोतरी का कोई गारंटी। फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमत नहीं होगी, जिससे मज़दूरों की अन्य काम देने वालों से बेहतर मज़दूरी की माँग करने की ताक़त कमज़ोर होगी और उन्हें बिना न्यूनतम मज़दूरी के, जो भी काम मिलेगा, उसे स्वीकार करने को मजबूर किया जाएगा। राज्य सरकार को कमजोर किया जा रहा है और उस पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। पहले मनरेगा के तहत मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकारें बिना किसी कठनाई के काम उपलब्ध करा पाती थीं। अब राज्य सरकारों को आपकी मज़दूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करना होगा।

जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल ने कहा कि मनरेगा के तहत देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी। देश की कसी भी ग्राम पंचायत में कसी भी परवार द्वारा काम माँगने पर 15 दनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद काम अब यह अधकार नहीं रहेगा, बिल्क सरकार की मर्जी से बाँटी जाने वाली एक “रेवड़ी” बन जाएगा। मोदी सरकार चुनेगी की कौन-सी ग्राम पंचायतों को काम मिलेगा और किसे नहीं।

जिला संगठन महासचिव प्रहलादसिंह मार्शल ने बताया कि प्रेसवार्ता में पूर्व मंत्री भंवरसिंह भाटी, जिला प्रमुख मोडाराम मेघवाल, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा, पूर्व मंत्री विरेन्द्र बेनिवाल, विधानसभा प्रत्याशी यशपाल गहलोत, देहात महिला कांग्रेस अध्यक्ष शान्ति बेनिवाल, शहर महिला कांग्रेस अध्यक्ष शशिकला राठौड़, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष भंवरलाल कूकणां, एनएसयूआई जिलाध्यक्ष श्रीकृष्ण गोदारा, सेवा दल अध्यक्ष रामनिवास गोदारा, जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक विभाग सत्तू खां, अध्यक्ष एससी विभाग मेवाराम मेघवाल, जिलाध्यक्ष कांग्रेस शिक्षक प्रकोष्ठ डालूराम सारण, सीए प्रकोष्ठ श्याम सुन्दर मून्धड़ा, डॉ. प्रीति मेघवाल, जिला परिषद सदस्य पुरखाराम गेधर, मोहनदान मण्डाल, शिव ओमप्रकाश गोदारा, ब्लॉक अध्यक्ष मदनलाल चौहान, लुम्बाराम, मनोज कुमार, बृजलाल लेघा, ईश्वरराम आदि मौजूद रहें।

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