
बीकानेर। पिछले 62 वर्षों से “श्री शास्त्रीय संगीत कला मन्दिर” संस्थान अनवरत संगीत शिक्षा ग्वालियर घराने व पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे संगीत शिक्षण पद्धति से सिखाने का कार्य कर रही है। कला मन्दिर की स्थापना 1964 में ग्वालियर घराने के शास्त्रीय गायक ” स्व पं मोतीलाल जी रंगा” जो कि बीकानेर के सिद्धहस्त शास्त्रीय – ख्याल, ठुमरी, सुगम संगीत (गीत, गजल व भजन गायक) द्वारा बड़ा बाजार स्थित महालक्ष्मी मन्दिर के स्थल पर हुई थी। समय चलते आज डागा चौक श्री नरसिंह जी मन्दिर के सामने “नरसिंह कृपा” हॉल स्थल पर निरन्तर दोपहर 2 बजे से 4 बजे व शाम 8 बजे से 10 बजे दो बैच में चल रही हैं। कला मन्दिर में संगीत विधार्थियों को संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा (बेसिक ज्ञान) हारमोनियम, तबला, वाद्य यन्त्र व गायन की शिक्षा दी जाती हैं पिछले 40 वर्षों से पं नारायण दास रंगा शहर के अंदरूनी हिस्से में यह उत्कृष्ट कार्य कर रहे इस संस्था से कई विधार्थी शिक्षित होकर अपना संगीत के क्षेत्र में नाम कर चुके हैं जिसमें -“श्री सखी” ग्रुप “किशोरी ग्रुप” अन्य और विद्यार्थी जो यहीं से डिप्लोमा कर सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में संगीत अध्यापन का कार्य कर रहे है।
पं नारायण दास रंगा स्वयं शास्त्रीय ख्याल व हवेली संगीत गायक हैं, जो निरन्तर स्थानीय मूंधड़ा बगेची श्री मदन मोहन मन्दिर जो कि नत्थूसर गेट के बाहर बिन्नानी कन्या महाविद्यालय के पास स्थित हैं वहां “कीर्तनकार” के पद पर नियुक्त हैं वहां सुबह 6 से 11 बजे व शाम को 4 से 7 बजे तक 6 समय के दर्शनों में ध्रुपद-धमार हवेलीसंगीत श्री कृष्ण की बाल लीलाओं के कीर्तन की सेवा पिछले 30 वर्षों से कर रहे है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में पिछले दो माह पूर्व पदम् भूषण भजन सम्राट अनूप जलोटा के बीकानेर आगमन पर स्वागत कार्यक्रम में कला मन्दिर के विद्यार्थियों के भजनों को सुनकर सराहना की व कला मन्दिर संस्थान को अपनी मिशन 500 टीम में शामिल करने की घोषणा की जो बीकानेर के लिए गौरव की बात है।