
बीकानेर,26 जुलाई। खजूर के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण रविवार को सम्पन्न हुआ । प्रशिक्षण में 37 प्रतिभागियों को खजूर से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद, जैसे लड्डू, शरबत, अचार, माउथ फ्रेशनर, केक, बिस्कुट, छुहारा एवं पिंड आदि बनाने की हैंड्स आन ट्रेनिंग दी गई ।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में खजूर का क्षेत्रफल निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में खजूर के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्य में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से खजूर उत्पादकों को आर्थिक हानि से बचाने के लिए अभी से वैकल्पिक रणनीति अपनानी होगी।
प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि डॉ. रूपम गुप्ता ने खजूर का अचार बनाने का प्रशिक्षण दिया। डॉ. ममता सिंह ने खजूर के बिस्कुट तैयार करने तथा माउथ फ्रेशनर बनाने की तकनीक सिखाई, डॉ. सी. पी. मीणा ने खजूर का शरबत बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को छुहारा, पिंड, लड्डू, केक सहित अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण की विधियाँ भी सिखाई गईं।
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि खजूर के नवीन एवं आकर्षक उत्पाद विकसित कर उनका प्रभावी प्रचार-प्रसार तथा विपणन करना समय की आवश्यकता है। इससे किसानों का आर्थिक लाभ बढ़ सकेगा।
राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक श्री मणि शंकर ने कहा कि मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण मिलने से प्रतिभागी स्वरोजगार के लिए प्रेरित होंगे।
क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक, डॉ भूपेंद्र सिंह शेखावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बी. डी. एस. नाथावत ने किया।