
बीकानेर, 12 अगस्त। सतत एवं आर्थिक विकास के लिए सहजन आधारित कृषि प्रणाली विषय पर चल रहे तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण का बुधवार को समापन हुआ। नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के तहत काजरी के क्षेत्रीय अनुसंधान स्थान के सभागार में आयोजित समापन समारोह में संभागीय आयुक्त श्री विश्राम मीणा मुख्य अतिथि रहे। इस अवसर पर नाबार्ड बीकानेर के डीडीएम श्री अरविंद चाहर की भी उपस्थिति रही।
समारोह में संभागीय आयुक्त श्री विश्राम मीणा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि भोजन को संतुलित एवं पोषक बनाने के लिए सहजन का दैनिक उपयोग महत्वपूर्ण है। सुपर फूड के नाम से जाना जाने वाला सहजन पोषण एवं औषधीय गुणों से भरपूर है। उन्होंने कहा कि सहजन एक बहुउपयोगी फसल है, जिसका उपयोग मानव पोषण, पशुपालन, कृषि सहित विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।
श्री मीणा ने कहा कि सहजन के विभिन्न उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर किसानों को रोजगार सृजन के साथ-साथ पोषण एवं आर्थिक सुरक्षा भी प्राप्त हो सकती है। उन्होंने सहजन के औषधीय गुणों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मिट्टी को भी उपजाऊ बनाने में सहायक है।
परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बोरवाल ने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार सहजन में शरीर की अनेक बीमारियों को दूर करने की क्षमता मानी गई है। यह वात एवं कफ दोष को कम करने में सहायक है। सहजन की पत्तियां एवं फल हमारे रक्त को साफ करने तथा पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में उपयोगी हैं।
उन्होंने बताया कि सहजन की सूखी पत्तियों में दूध की तुलना में लगभग चार गुना अधिक कैल्शियम, संतरे की तुलना में सात गुना अधिक विटामिन-सी, गाजर की तुलना में चार गुना अधिक विटामिन-ए तथा पालक की तुलना में तीन गुना अधिक आयरन पाया जाता है। इसमें विभिन्न पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होने के कारण यह स्वास्थ्य एवं पोषण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि सहजन हमारे देश की मिट्टी में आसानी से उगने वाला पौधा है। इसके पत्तों एवं फलियों को दैनिक आहार में शामिल कर महंगी दवाओं एवं सप्लीमेंट्स पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है।
काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में सहजन यानी सहजना केवल एक पौधा नहीं, बल्कि पृथ्वी एवं मानव जाति दोनों के लिए एक सार्थक और शक्तिशाली सुरक्षा कवच सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए सहजन भविष्य का महत्वपूर्ण हथियार है।
काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ बीरबल मील ने बताया कि प्रशिक्षण में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से 50 किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1000 सहजन के पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे। नाबार्ड की सहभागिता से काजरी बीकानेर में संचालित इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 700 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रशिक्षित किसानों में से 250 किसानों के खेतों में अब तक 2.5 लाख से अधिक सहजन के पौधे लगाए जा चुके हैं।
कार्यक्रम में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री मूल सिंह गहलोत एवं डॉ. सीताराम जाट ने भी सहयोग किया।