
जयपुर, 17 अगस्त। सहकारिता विभाग के समस्त जिला कार्यालयों, सहकारी संस्थाओं, सहकारी बैंकों, सहकारी समितियों, पैक्स एवं क्रय-विक्रय सहकारी समितियों में आमजन को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाने तथा सहकारिता आंदोलन की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए अब समय-समय पर पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण किया जाएगा।
शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने बताया कि विभाग के संभाग एवं जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा संबंधित सहकारी संस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इसका उद्देश्य आमजन एवं किसानों को ऋण वितरण, खाद-बीज आपूर्ति, बैंकिंग सुविधाओं सहित विभिन्न सहकारी सेवाओं का लाभ सुगमता एवं गुणवत्तापूर्वक उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही जिला कार्यालयों एवं सहकारी संस्थाओं में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बेहतर कार्य निष्पादन के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। रिकॉर्ड प्रबंधन तथा समयबद्ध कार्य निष्पादन में सुधार पर भी विशेष ध्यान रहेगा।
पारदर्शी सुशासन एवं जवाबदेही पर रहेगा जोर
डॉ. शर्मा ने कहा कि पारदर्शी सुशासन के लिए उत्तरदायी प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था लागू करते हुए विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। जिला पर्यवेक्षण व्यवस्था के तहत मुख्यालय, क्षेत्रीय एवं जिला कार्यालयों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा तथा मासिक प्रगति की समीक्षा एवं आवंटित जिलों की प्रगति रिपोर्ट का मूल्यांकन किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक एवं व्यावहारिक समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। महत्वपूर्ण प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण तथा लंबित मामलों एवं महत्वपूर्ण फाइलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
प्रत्येक तीसरे माह होगा जिला/खंड का पर्यवेक्षण
शासन सचिव ने निर्देश दिए कि जिला नोडल अधिकारियों द्वारा आवंटित जिले/खंड का प्रत्येक तीसरे माह कम से कम एक बार पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण किया जाए। साथ ही जिला समीक्षा बैठकों एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिला नोडल अधिकारी के रूप में सहभागिता कर कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधार सुनिश्चित किया जाए।