
बीकानेर। नगर निगम के महापौर एवं उपमहापौर चुनाव के बाद सामने आए मतदान के अलग-अलग समीकरणों ने कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद जहां पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग के आरोपों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अब कांग्रेस पार्षद मनोज विश्नोई ने सामने आकर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब दिया है। हालिया सार्वजनिक रिपोर्टों में भी इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस के भीतर जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग सामने आई है।
सोमवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में विश्नोई ने कहा कि चुनाव परिणाम को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित करने के बजाय पूरे घटनाक्रम को संगठनात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी एक पार्षद को निशाना बनाकर चुनावी परिणाम की पूरी जिम्मेदारी उस पर डाल देना उचित नहीं है।
विचारधारा पर सवाल उठाने को लेकर जताई आपत्ति
मनोज विश्नोई ने कांग्रेस नेता गुलाम मुस्तफा की ओर से टिकट वितरण में गैर-कांग्रेसी अथवा अलग विचारधारा वाले लोगों को स्थान मिलने संबंधी आरोपों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी की राजनीतिक प्रतिबद्धता का फैसला केवल आरोपों या राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर नहीं किया जा सकता।
विश्नोई ने कहा कि यदि उनके राजनीतिक आचरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो उनके पिछले सार्वजनिक राजनीतिक रुख को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वे निर्दलीय होने के बावजूद कांग्रेस के साथ खड़े रहे और पार्टी के हित में अपनी भूमिका निभाते रहे।
उन्होंने कहा कि उन्हें किसी नेता से अपनी राजनीतिक निष्ठा का प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति की भूमिका और उसके द्वारा लिए गए राजनीतिक निर्णय ही उसकी स्थिति को स्पष्ट करते हैं।
व्यक्तिगत विवाद को सामुदायिक मुद्दा बनाने से बचने की अपील
विश्नोई ने चुनावी विवाद को सामुदायिक दृष्टिकोण से देखने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महापौर और उपमहापौर का चुनाव संगठनात्मक एवं राजनीतिक प्रक्रिया थी, इसलिए इसके परिणामों का विश्लेषण भी उसी आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच मतभेदों को चुनावी हार से जोड़ना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, यदि किसी प्रत्याशी के नाम को लेकर पार्टी के भीतर ही अलग-अलग राय थीं तो उस स्थिति का समाधान चुनाव से पहले संगठनात्मक स्तर पर होना चाहिए था।
विश्नोई ने कहा कि बीकानेर जैसे शहर में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है।
प्रत्याशी चयन और आपसी समन्वय पर उठाए सवाल
कांग्रेस पार्षद ने कहा कि उपमहापौर चुनाव के दौरान कई नाम सामने आने से पार्टी के भीतर सहमति बनाने की चुनौती स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पार्षदों और नेताओं की पसंद अलग होने के कारण पार्टी के अंदर एकजुट रणनीति तैयार नहीं हो सकी।
उन्होंने जावेद पड़िहार, अब्दुल वाहिद और नसीम बानो के नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नामों को लेकर भी कांग्रेस के पार्षदों में अलग-अलग राय रही। उनका कहना था कि जब पार्टी के निर्वाचित सदस्यों के बीच किसी एक नाम को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई तो बाद में सामने आए चुनाव परिणामों का दोष किसी एक व्यक्ति पर डालना उचित नहीं है।
विश्नोई ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के पार्षदों की ओर से भी प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी राजनीतिक दलील रखी गई थी। उनके अनुसार, इस तरह की अलग-अलग अपेक्षाओं और दावेदारियों ने पार्टी के भीतर सहमति की प्रक्रिया को प्रभावित किया।
मतदान की घटनाओं को लेकर भी हो समीक्षा
विश्नोई ने मतदान के दौरान सामने आए कुछ परिणामों को भी संगठन के लिए विचारणीय बताया। उन्होंने कहा कि एक पार्षद का वोट नोटा में जाना और दूसरे का मत निरस्त होना ऐसी घटनाएं हैं जिनकी वजहों पर पार्टी को विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निर्वाचित पार्षद से मतदान के दौरान हुई ऐसी स्थिति केवल आरोप लगाने का विषय नहीं, बल्कि संगठनात्मक प्रशिक्षण, समन्वय और चुनावी प्रबंधन की समीक्षा का विषय भी है।
उनका कहना था कि यदि पार्टी वास्तव में भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचना चाहती है तो उसे केवल क्रॉस वोटिंग की तलाश करने के बजाय चुनाव से पहले की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करनी होगी।
‘दावे हैं तो प्रमाण भी सामने आने चाहिए’
अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर विश्नोई ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो उनके समर्थन में तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे कई तथ्य और दस्तावेज हैं, जिनसे चुनाव के दौरान बने राजनीतिक समीकरणों पर अलग तस्वीर सामने आ सकती है।
उन्होंने कहा कि उनके पास केवल कांग्रेस से जुड़े लोगों के संबंध में ही नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम से संबंधित जानकारी भी मौजूद है। जरूरत पड़ने पर वह संबंधित तथ्य और प्रमाण संगठन अथवा उचित मंच के सामने रखने के लिए तैयार हैं।
विश्नोई ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ अभियान चलाना नहीं है, बल्कि अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देना और वास्तविक घटनाक्रम को सामने रखना है।
‘जिसके पास तथ्य हैं, वह संगठन के सामने रखे’
कांग्रेस पार्षद ने कहा कि यदि किसी नेता अथवा पार्षद के पास क्रॉस वोटिंग को लेकर कोई ठोस जानकारी है तो उसे सार्वजनिक आरोपों के बजाय पार्टी के अधिकृत मंच पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इससे संगठन को निष्पक्ष तरीके से मामले की पड़ताल करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि गुप्त मतदान वाली प्रक्रिया में किसी विशेष पार्षद के बारे में निष्कर्ष निकालने से पहले प्रमाण और प्रक्रिया दोनों का ध्यान रखना जरूरी है। हालिया रिपोर्टों में भी गुप्त मतदान के कारण किसी खास पार्षद की क्रॉस वोटिंग को निश्चित रूप से साबित करने की चुनौती का उल्लेख किया गया है।
‘कांग्रेस को आरोपों से नहीं, संवाद से मजबूत करना होगा’
मनोज विश्नोई ने कहा कि चुनाव समाप्त हो चुका है और अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखने की है। उन्होंने कहा कि लगातार सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से कार्यकर्ताओं और पार्षदों के बीच दूरी बढ़ सकती है।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्षद के खिलाफ केवल राजनीतिक बयान के आधार पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
विश्नोई ने कहा कि कांग्रेस को आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत आरोपों से ऊपर उठकर संगठनात्मक अनुशासन, आपसी संवाद और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम करना होगा।
उन्होंने दोहराया कि यदि उनके खिलाफ कोई आरोप है तो वह उसका जवाब देने के लिए तैयार हैं और यदि उनके पास मौजूद तथ्यों की आवश्यकता संगठन को महसूस होती है तो वे उन्हें संबंधित मंच पर रखने से पीछे नहीं हटेंगे।