
बीकानेर, 5 अक्टूबर। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पीबीएम अस्पताल के मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग तथा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम इकाई की ओर से संचालित जागरूकता अभियान के दूसरे दिन अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से लोगों को मानसिक मजबूती और नशे से बचाव का संदेश दिया गया। दिनभर चले कार्यक्रमों में योग एवं प्राणायाम सत्र, विद्यार्थियों के लिए परीक्षा दबाव से निपटने संबंधी प्रशिक्षण तथा शहर में ई-रिक्शा के माध्यम से जनसंदेश प्रसारित किया गया।
योग और प्राणायाम से मानसिक संतुलन पर जोर
पीबीएम अस्पताल स्थित मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग में उपचार के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए सुबह विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें योगाभ्यास, ध्यान और प्राणायाम के जरिए तनाव एवं मानसिक दबाव को कम करने के व्यावहारिक तरीके समझाए गए।
विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीगोपाल गोयल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित दिनचर्या, पर्याप्त विश्राम, अच्छी नींद और सकारात्मक दृष्टिकोण को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि योग और ध्यान व्यक्ति को मानसिक रूप से स्थिर रखने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने नशे से बचाव तथा मानसिक परेशानी होने पर समय रहते विशेषज्ञ से संपर्क करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा नशे से स्वयं को दूर रखने का संकल्प लिया। एटीएफ की काउंसलर नीलिमा सोलंकी एवं सोनू जयपाल भी मौजूद रहे। यह सत्र ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के ऑनलाइन कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधि के रूप में आयोजित किया गया। विभाग की ओर से बताया गया कि ऐसी गतिविधियां अगले 15 दिनों तक जारी रहेंगी।
परीक्षा के दबाव को लेकर नर्सिंग विद्यार्थियों से संवाद
राजकीय नर्सिंग कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए परीक्षा के दौरान उत्पन्न होने वाले मानसिक दबाव को लेकर विशेष सत्र आयोजित किया गया। ‘एग्जाम स्ट्रेस मैनेजमेंट’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को परीक्षा संबंधी चिंता और तनाव को नियंत्रित करने के विभिन्न तरीके बताए गए।
मानसिक रोग एवं नशा मुक्ति विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरफूल सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अनामिका ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के ‘आई सपोर्ट’ सहित विभिन्न जागरूकता मॉड्यूल की जानकारी दी।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान अनावश्यक दबाव लेने के बजाय पढ़ाई की व्यवस्थित योजना बनाना, समय का सही विभाजन करना, पर्याप्त नींद लेना और बीच-बीच में विश्राम करना उपयोगी रहता है। साथ ही मानसिक बेचैनी अथवा अत्यधिक तनाव की स्थिति में समस्या को छिपाने के बजाय परिवार, शिक्षक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बातचीत करने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने नशे से दूरी बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाने की शपथ ली।
सड़कों पर उतरा जागरूकता संदेश, ई-रिक्शा रैली ने लोगों का ध्यान खींचा
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आम नागरिकों तक सीधा संदेश पहुंचाने के लिए शहर में ई-रिक्शा जागरूकता रैली आयोजित की गई। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. लोकेश गुप्ता और एपिडेमियोलॉजिस्ट नीलम प्रताप सिंह सहित सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने रैली को रवाना किया।
रैली में शामिल ई-रिक्शा पर मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति और सामाजिक जागरूकता से संबंधित संदेश प्रदर्शित किए गए। इनके माध्यम से लोगों से मानसिक बीमारी को लेकर बनी गलत धारणाओं को छोड़ने तथा जरूरतमंद व्यक्ति के साथ संवेदनशील व्यवहार करने की अपील की गई।
आयोजकों ने कहा कि मानसिक बीमारी किसी भी अन्य स्वास्थ्य समस्या की तरह उपचार योग्य है। इसके बावजूद झिझक और सामाजिक संकोच के कारण कई लोग समय पर सहायता नहीं ले पाते। ऐसे में जागरूकता के माध्यम से लोगों को उपचार एवं परामर्श की उपलब्ध सुविधाओं से जोड़ना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
आगामी दिनों में भी जारी रहेगा जनजागरूकता अभियान
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम इकाई की ओर से बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों की समझ बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में स्कूल, कॉलेज, चिकित्सा संस्थानों और विभिन्न सामुदायिक क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के माध्यम से तनाव प्रबंधन, नशा मुक्ति, मानसिक बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार के प्रति लोगों को लगातार जानकारी दी जाएगी।