
बीकानेर। जैन धर्म की एक अत्यंत प्रतिष्ठित, प्रभावशाली और आदरणीय साध्वी जी (म.सा.) विचक्षणमणि गुरुमां श्री सुरंजनाश्रीजी महाराज साहब की पुण्यतिथि पर रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगनजी महाराज के उपासरे में कार्यक्रम आयाेजित किया गया।
उपासरा ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. के पावन सानिध्य में पुण्यतिथि मनायी गयीं। इस अवसर पर चित्तलेहांजनाश्री जी म.सा., सुरक्षांजनाश्रीजी म.सा., साैम्यांजनाश्रीजी म.सा., चित्तखरांजनाश्रीजी म.सा. भी उपासरे में माैजूद रहीं।
चातुर्मास की विभिन्न व्यवस्थाएं देख रहे ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया ने बताया कि आज के प्रवचन में साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने कहा कि गुरु मां सुरंजनाश्रीजी महाराज साहब काे जैन समाज में आध्यात्मिक मार्गदर्शन, तपस्या और धार्मिक प्रभाव के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। राजस्थान के गुड़ामालानी क्षेत्र के धार्मिक व आध्यात्मिक जीर्णोद्धार का श्रेय भी उन्हें दिया गया है, जिसके कारण उन्हें ‘गुड़ामालानी उद्धारिका’ भी कहा जाता है। उन्हाेंने कहा कि उनके द्वारा कार्य आज भी भूलाए नहीं भूलता है। वे मुस्कुराकर सबसे मिलते थे। वे केवल साध्वी नहीं बल्कि परमात्मा का स्वरुप थे। उनके द्वारा दी गयी महामांगलिक से कष्ट समाप्त हाे जाते थे। साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी म.सा. ने यह भी कहा कि संसार चलता रहता है, लेकिन समय जब आता है ताे महापुरुषाें की याद आती ही है।