
बीकानेर : रांगड़ी चाैक के श्री सुगन जी महाराज के उपासरे में चातुर्मास कर रही साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.साने गुरुवार काे पर्युषण पर्व के तीसरे दिन श्रावक जीवन के सालभर करने याेग्य 11 वार्षिक कर्तव्यों का विशेष उल्लेख और उनका पालन करने की प्रेरणा दी।उपासरे में ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि साध्वी मुक्ताजनाश्री जी म.सा. द्वारा विशेष
प्रवचनाें में संघ पूजा,
साधर्मिक भक्ति (वात्सल्य), यात्रा-त्रिक, स्नात्र महोत्सव, देवद्रव्य वृद्धि, महापूजा, रात्रि जागरण (धर्म जागरण), श्रुत भक्ति (ज्ञान भक्ति), उद्यापन, तीर्थ प्रभावना (शासन प्रभावना), आलोचना (प्रायश्चित/हृदय शुद्धि) का पालन की सीख दी।ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद
गुलगुलिया व सहमंत्री मनीष नाहटा ने बताया कि साध्वी
मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका की प्रभावना और सम्मान करना, अपने सहधर्मी (समान धर्म को मानने वाले) भाइयों की सहायता और उनका बहुमान करना, तीर्थ स्थलों की यात्रा करना, भगवान जिनेंद्र की प्रतिमा का अभिषेक और पूजनोत्सव करना, जिनेन्द्र भगवान के मंदिर व कार्यों के लिए देव द्रव्य की प्रभावना या वृद्धि करना, भगवान की बड़ी पूजा या अष्ट प्रकार की महापूजा का आयोजन करना, रात्रि में प्रभु भक्ति, भजन या धार्मिक जागरण करना, धार्मिक ग्रंथों (ज्ञान) की पूजा, पठन और उनका प्रसार करना, किसी तपस्या या व्रत का विधि-विधान के साथ उद्यापन करना, जैन धर्म और तीर्थों की प्रभावना करना ताकि लोग धर्म से प्रेरित हों, अपने दोषों की सच्चे मन से आलोचना करना और प्रायश्चित कर हृदय को शुद्ध करना आदि साल के 11 कर्तव्याें की पालना करने की बात कही।गुलगुलिया ने बताया कि पर्यूषण पर्व के दिनाें में एकासना का लाभ लेने वालाें में सुंदरलाल प्रदीप सेठी परिवार व कंवरलाल मनीष कुमार नाहटा परिवार व लक्ष्मीचंद जी दुग्गड़ परिवार रहा।