
बीकानेर। रांगड़ी चाैक में श्री सुगन जी महाराज के उपासरे में साध्वी मुक्तांजनाश्री जी महाराज सा. की पावन निश्रा में पर्युषण पर्व के पांचवें दिन भगवान महावीर के जन्म कल्याणक का वाचन और उत्सव की शुरुआत हुई।
उपासरे ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि इस दिन कल्प सूत्र का पाठ किया गया, जिसमें भगवान महावीर के जन्म और उनकी माता त्रिशला द्वारा देखे गए 14 स्वप्नों का सुंदर वर्णन शुरु किया गया। भगवान महावीर के जन्म प्रसंग पर विशेष उल्लास मनाया जाता है, जिसे जैन समाज का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है।
साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. की पावन निश्रा में 14 स्वप्नाें का गजराज/हाथी, वृषभ/बैलों, सिंह, लक्ष्मीजी, पुष्पमाला, पूर्ण चंद्रमा, सूर्य, ध्वजा, कलश, पद्म सरोवर, क्षीर सागर/समुद्र, देव विमान, रत्न राशि, निधूम अग्नि) का विशेष उल्लेख किया गया।
साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने कहा कि यह दिन अंतर्मुखी होने, कल्पसूत्र के वचनों के माध्यम से तीर्थंकर के पवित्र जीवन को स्मरण करने और अपनी आत्मा को शुद्ध करने का विशेष अवसर होता है।
मनोज सेठिया, कंवरलाल सेठिया, अनिल सुराना ने कहा कि विश्व के लगभग सभी धर्मों के पर्वों में ज्यादातर खाने-पीने व भोग की वस्तुओं का बोलबाला रहता है, जबकि जैन धर्म का पर्युषण पर्व कठोरतम साधना तथा पूजा, आराधना व तप-ध्यान के साथ मनाया जाता है। पर्युषण आत्मा के कर्म एवं कषाय रूपी मलों को जलाकर उसके शुद्ध स्वरूप को प्रकट करने का विधान है।
ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया, सहमंत्री मनीष नाहटा, ट्रस्टी संदीप मुसरफ ने विभिन्न व्यवस्थाएं देखीं। गुलगुलिया ने बताया कि उपासरे के पास ही महावीर भवन में एकासना करने वाले श्रावक-श्राविकाओं के लिए अभी तक एकासना लाभ लेने वालाें में सुंदरलाल प्रदीप सेठी परिवार व कंवरलाल मनीष कुमार नाहटा परिवार व लक्ष्मीचंद जी दुग्गड़ परिवार शामिल रहा।