
बीकानेर। पर्युषण पर्व के चाैथे दिन शुक्रवार काे रांगड़ी चाैक स्थित श्री सुगन जी महाराज के उपासरे में साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म. सा. ने भगवान महावीर के जीवन चरित्र पर अपने विचार रखे।
उपासरा ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची ने बताया कि श्वेतांबर जैन परंपरा में पवित्र ग्रंथ कल्पसूत्र के आधिकारिक वाचन शुरू होता है और भगवान महावीर के जीवन-चरित्र तथा उनकी गर्भावस्था से जुड़े प्रसंगों का विशेष वर्णन किया जाता है।
साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. की पावन निश्रा में चौथे दिन के वाचन में भगवान महावीर के जीव द्वारा माता त्रिशला (कुण्डग्राम के राजा सिद्धार्थ की रानी) के गर्भ में आने से पहले देखे गए 14 शुभ और मंगलकारी स्वप्नों (जैसे हाथी, बैल, सिंह, लक्ष्मी, चंद्रमा, सूर्य आदि) का अत्यंत सुंदर व विस्तृत वर्णन किया गया।
साध्वी मुक्तांजनाश्री जी म.सा. ने कहा कि यह दिन अंतर्मुखी होने, कल्पसूत्र के वचनों के माध्यम से तीर्थंकर के पवित्र जीवन को स्मरण करने और अपनी आत्मा को शुद्ध करने का विशेष अवसर होता है।
मनोज सेठिया, कंवरलाल सेठिया, अनिल सुराना ने कहा कि विश्व के लगभग सभी धर्मों के पर्वों में ज्यादातर खाने-पीने व भोग की वस्तुओं का बोलबाला रहता है, जबकि जैन धर्म का पर्युषण पर्व कठोरतम साधना तथा पूजा, आराधना व तप-ध्यान के साथ मनाया जाता है। पर्युषण आत्मा के कर्म एवं कषाय रूपी मलों को जलाकर उसके शुद्ध स्वरूप को प्रकट करने का विधान है।
ट्रस्ट के काेषाध्यक्ष प्रमाेद गुलगुलिया, सहमंत्री मनीष नाहटा, ट्रस्टी संदीप मुसरफ ने विभिन्न व्यवस्थाएं देखीं। गुलगुलिया ने बताया कि उपासरे के पास ही महावीर भवन में एकासना करने वाले श्रावक-श्राविकाओं के लिए अभी तक एकासना लाभ लेने वालाें में सुंदरलाल प्रदीप सेठी परिवार व कंवरलाल मनीष कुमार नाहटा परिवार व लक्ष्मीचंद जी दुग्गड़ परिवार शामिल रहा।