
चेन्नई। सिद्धेश्वर वर्ल्ड फाउंडेशन, चेन्नई केंद्र एवं श्री ब्रह्मर्षि आश्रम, तिरुपति के संयुक्त तत्वावधान में चेन्नई में श्री गुरु पूर्णिमा महामहोत्सव-2026 श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। परम पूज्य ॐ सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी के दिव्य सान्निध्य में आयोजित इस महोत्सव में मॉरीशस व भारत के प्रधानमंत्री सहित देश विदेश के अनेक मंत्रियों व नेताओं ने अपना मैसेज भेजकर तथा वैश्विक स्तर पर हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा, कृतज्ञता अर्पित की। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, सामूहिक ध्यान, गुरु पूजन एवं प्रार्थना में भाग लेकर आत्मिक शांति और दिव्य आनंद का अनुभव किया।
पैटर्न गुरु प्रकाश खिवसरा एवं जगदीश कडवल के प्रमुख सौजन्य में हुए इस आयोजन में अपने आशीर्वचनों पूज्यश्री ॐ सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी ने कहा कि गुरु मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा प्रकाश हैं। सद्गुरु ही वह दिव्य शक्ति है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर आत्मज्ञान का दीप प्रज्वलित करती है तथा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि जीवन की वास्तविक सफलता धन, वैभव अथवा सांसारिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, ईश्वर से जुड़ाव और मानव सेवा में निहित है। यह दिव्य मार्ग सद्गुरु की कृपा, श्रद्धा और समर्पण से ही प्राप्त होता है।
ॐ सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी ने धर्म के महत्व पर कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ का विषय नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, करुणा और मानवता की रक्षा का मार्ग है। उन्होंने कहा कि धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए साहस एवं दृढ़ता आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रप्रेम का संदेश देते हुए कहा कि विदेश चाहे कितना भी आकर्षक क्यों न हो, अपना देश सदैव सर्वोपरि रहता है।
भारत की आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए वे बोले, यह ऋषियों, संतों और दिव्य अवतारों की पुण्यभूमि है तथा विश्व आज भी भारत के आध्यात्मिक ज्ञान की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है। उन्होंने कहा कि आज अनेक देशों में युद्ध हो रहा है।जबकि वहां की जनता युद्ध नहीं अपितु बुद्ध चाह रही है।
देशभर में 2100 एआई आधारित आधुनिक विद्यालय स्थापित करने का संकल्प..
इस अवसर पर ॐ सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी ने आश्रम की ग्लोबल चेयरपर्सन सरला बाई बोथरा को उपासिका (मां) तथा राजेश जैन उपासक (पुत्र) पदवी का जिम्मा देकर नवाजा गया। जो आश्रम ओर से आध्यात्मिक परंपरा का दायित्व संभालेंगे। उपस्थित श्रद्धालुओं ने हर्ष और श्रद्धा के साथ स्वागत किया।
ॐ सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी ने नारी शिक्षा को समाज परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए घोषणा की कि प्रत्येक बेटी को शिक्षित बनाने के उद्देश्य से देशभर में 2100 एआई आधारित आधुनिक विद्यालय स्थापित करने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक संस्कारों का भी समन्वय किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के उद्योगपति जुगल तनेजा बेंगलूरु में करोड़ों रुपये की लागत से एआई आधारित अस्पताल और आधुनिक शिक्षा पद्धति पर आधुनिक विद्यालय स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धन की वास्तविक सार्थकता तभी है जब उसका उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा जैसे लोक कल्याणकारी कार्यों में किया जाए।
ॐ सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी ने कहा कि “दान देने वाला ही वास्तविक अर्थों में धनी होता है।” उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे निस्वार्थ भाव से समाज और भगवान के कार्यों में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जब कोई कार्य पूर्ण समर्पण और ईश्वरभाव से किया जाता है, तब वह कार्य भगवान का कार्य बन जाता है और उसकी सफलता का मार्ग स्वयं प्रशस्त हो जाता है।
सद्गुरु का सान्निध्य आत्मा के जागरण का दिव्य अवसर
अपने संदेश में ॐ सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी ने कहा कि भगवान और गुरु से अपना आध्यात्मिक संबंध जितना गहरा होगा, जीवन के कष्ट उतने ही दूर होते जाएंगे। उन्होंने कहा कि सद्गुरु का सान्निध्य आत्मा के जागरण का दिव्य अवसर है। जो व्यक्ति गुरु के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण रखता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं। गुरु मनुष्य को स्वयं की पहचान कराते हैं और उसे प्रेम, सेवा, करुणा, सत्य तथा मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। महामहोत्सव के दौरान एक अत्यंत भावपूर्ण क्षण तब आया जब परम पूज्य ॐ सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षिजी ने झोली फैलाकर उपस्थित श्रद्धालुओं से भिक्षा मांगी। यह भिक्षा धन या वस्तुओं की नहीं थी, बल्कि उन्होंने भक्तों से उनके भीतर के क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, मोह और अहंकार को भिक्षा के रुप में अर्पित करने का आह्वान किया। ब्रह्मर्षिजी ने कहा कि जब मनुष्य इन विकारों का त्याग कर देता है, तभी उसके भीतर प्रेम, करुणा, शांति और ईश्वर का प्रकाश स्थापित होता है। इस अनूठे आध्यात्मिक संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त प्राणियों के सुख-समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना
गुजरात से गौरव आचार्य सैकड़ो श्रद्धालुओं के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके अतिरिक्त देश के अनेक राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त अपने परिवारों एवं साधक समूहों के साथ महोत्सव में पहुँचे। कार्यक्रम के समापन पर विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त प्राणियों के सुख-समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त कर प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर अनेक राज्यों से मंत्री, सांसद, न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी के इलावा साध्वी संघमित्राजी, एमएस. बिट्टा, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, राजस्थान से केबिनेट मंत्री केके. बिश्नोई, केसी. बिश्नोई, विजय शर्मा, संदीप सक्सेना (आईईएस), प्रदीप यादव (आईईएस), मंगत शर्मा (आईईएस), अविनाश कुमार (आईईएस), कृष्णमूर्ति, अल्बर्ट, सुभाष चंद्र (कमिश्नर), बच्चू सिंह (एडीएम, गाज़ियाबाद), रमेश सांखला, आचार्य श्रीनिवास श्रीमाली, घनश्याम मोदी, शांतिलाल मेहता, आशीष मेहता, जितेंद्र श्रीमाली, प्रिया गोलेछा, ओमप्रकाश शर्मा, संजय शर्मा, सुभाष चंद्रा, प्रमोद पालीवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं श्रद्धालु कार्यक्रम में उपस्थित रहे।