
बीकानेर। ऋषि पंचमी के पावन अवसर पर गायत्री भवन मंडल एवं श्री मोतीलाल ओझा परिवार की ओर से धरणीधर महादेव तालाब परिसर में श्रावणी कर्म, जल कर्म, तर्पण, हेमादि संकल्प एवं ऋषि पूजा के साथ यज्ञ तथा महाप्रसाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन श्री गिरिजा शंकर ओझा के आचार्यत्व एवं नेतृत्व में विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के प्रवक्ता अशोक पुरोहित ने बताया कि हिंदू सनातन परंपरा में जिन ब्राह्मणों का यज्ञोपवीत संस्कार हो चुका है, उनके लिए श्रावणी कर्म का विशेष महत्व है। ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं वैश्य समाज में इस धार्मिक कर्म को परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि श्रावणी कर्म एवं ऋषि पूजा करने से ऋषिगण प्रसन्न होते हैं तथा परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि ऋषि पूजा के माध्यम से अपने ऋषि-मुनियों एवं पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऋषिगण अपने वंशजों की रक्षा एवं कल्याण करते हैं।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम जल कर्म, तर्पण एवं संकल्प आदि धार्मिक विधियां संपन्न करवाई गईं। इसके पश्चात विधि-विधान से यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में शिवनारायण पुरोहित ने भाग लिया।
इस अवसर पर वरिष्ठजन ऋषि नारायण बोहरा, अशोक पुरोहित, घनश्याम किराडू, हरिनारायण व्यास एवं वाली बोहरा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान लगभग 70 ऋषियों ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर ऋषि पूजा एवं श्रावणी कर्म संपन्न किया।
कार्यक्रम के समापन पर श्री शिवकुमार श्यामजी किराडू की ओर से महाप्रसाद का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया और परिवार, समाज एवं समस्त मानवता के सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।