
बीकानेर 15 सितंबर। शुष्क क्षेत्र की विभिन्न दलहनी फसलों और अन्य कृषि गतिविधियों की जानकारी लेने आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि मंडल ने भ्रमण के दूसरे दिन एसकेआरएयू के रोजड़ी फॉर्म का निरीक्षण किया। विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉक्टर एन के शर्मा ने बताया कि प्रतिनिधि मंडल को फील्ड का विजिट करवाते हुए मूंग और मोठ की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई तथा उनकी विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान किया गया .इस दौरान स्थानीय किसानों के साथ एक संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसमें यहां के किसानों ने स्थानीय फसलों में आ रही विभिन्न प्रकार की चुनौतियां, जलवायु परिवर्तन संबंधी नई समस्याओं, आर्थिक लाभों से जुड़ी विभिन्न जानकारियां प्रतिनिधिमंडल के साथ साझा की। इस दौरान स्थानीय किसानों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से अफ्रीकी देशों के शुष्क क्षेत्रों में की जा रही फसलों की खेती और संभावनाओं के बारे में जानकारियां ली।
किर्क हाउस ट्रस्ट की डॉ क्लोडिया ने बताया कि इस भ्रमण के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय कृषि शोध क्षेत्र में कार्यरत सदस्यों को भारत के शुष्क गर्म प्रदेशों में होने वाली विभिन्न खाद्य सुरक्षा आधारित फसलों की तकनीकी बारीकियां नजदीकी से देखने और समझने का अवसर मिला है। विश्वविद्यालय के द्वारा किए जा रहे विभिन्न शोध अनुसंधान कार्य की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों की समृद्धि यहां के कृषि विश्वविद्यालय के शोध कार्यों से स्पष्ट रूप से झलकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित किए जा रही दलहनी फसलों का अफ्रीका के विभिन्न देशों में जर्म प्लाज्म आदान-प्रदान किया जा रहा है इससे कृषि विविधता व खाद्य सुरक्षा को गति मिलेगी।
प्रतिनिधि मंडल सदस्यों के साथ विश्वविद्यालय वैज्ञानिकों द्वारा संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।